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आपेक्षिकता से पूर्व की भौतिकी
गुणा करने पर हमें कोटि
का प्रदिश प्राप्त होता है जिसमें पहले प्रदिश के सभी घटकों को दूसरे प्रदिश के सभी घटकों से गुणा करके प्राप्त किया जाता है
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संकुचन: किसी
कोटि के प्रदिश में उसके दो परिमित सूचकांकों को एक दूसरे के समान करके उस सूचकांक पर संकलन करने से हमें
कोटि का प्रदिश प्राप्त होता है:
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जिसकी उपपत्ति इस प्रकार है
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इन मूलभूत संक्रिया नियमों के अतिरिक्त प्रदिशों का निर्माण अवकलन से भी किया जा सकता है:
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रैखिक लाम्बिक रूपान्तरण के सापेक्ष नये प्रदिशों का निर्माण भी प्रदिशों के मध्य संक्रियाओं के नियमों के अनुसार किया जा सकता है।
प्रदिशों के सममित गुणधर्म (Symmetrical Properties of Tensors): किसी प्रदिश को उसके किसी दो सूचकांको
व
के सापेक्ष सममित अथवा विषम-सममित कहा जाता है यदि प्रदिश के उन घटकों को बदला जाये जिससे दोनों सूचकांको
व
को आपस में बदलें और इससे प्राप्त प्रदिश, मूल प्रदिश के समान अथवा विपरीत चिह्न वाला प्राप्त हो।
- सममिति की शर्त :

- विषम-सममिति की शर्त :

प्रमेय: सममित अथवा विषम-सममित का गुण निर्देशांक के चयन से स्वतंत्र होता है और इसमें ही इनका