समय पर निर्देशांक हैं। यदि हम त्वरण को आंशिक अवलकल गुणांको (partial differential coefficients) में व्यक्त करें तब का भाग देने पर
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हमें यह प्रदर्शित करना चाहिए कि यह समीकरण कार्तीय निर्देश तंत्र के विशेष चयन से स्वतंत्र है। एक सदिश है और इसके परिणामस्वरूप भी एक सदिश होगा। द्वितीय कोटि का प्रदिश है एवं तीसरी कोटि का प्रदिश है। बायीं तरफ का दूसरा पद (व्यंजक) सूचकांकों के संकुचन से प्राप्त होता है। दायीं ओर का दूसरे व्यंजक की सदिश प्रकृति स्पष्ट है। इसी क्रम में दायीं ओर के पहले व्यंजक के सदिश होने के लिए आवश्यक है कि एक प्रदिश हो। तब अवकलन और संकुचन से प्राप्त होगा और अतएव एक सदिश यह व्यंजक सदिश है जो एक सदिश और अदिश के व्युत्क्रम के गुणनफल से प्राप्त होता है। चूँकि एक प्रदिश है और अतएव समीकरण के अनुसार रूपान्तरण
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की यांत्रिकी में उपपत्ति अत्यल्प चतुष्फलक के सापेक्ष समीकरण के समाकलन से किया गया है। वहाँ पर अत्यल्प लघु समान्तरषट्फलक से आघूर्णों की प्रमेय के अनुप्रयोग से यह भी सिद्ध किया गया है कि और इसी कारण प्रतिबल (stress) प्रदिश सममित प्रदिश है। उपरोक्त चर्चा के अनुसार यह निष्कर्ष निकलता है कि उपरोक्त नियमों की सहायता से