दिक् में लाम्बिक रूपान्तरणों (घूर्णी रूपान्तरण) के सापेक्ष समीकरण सहपरिवर्ती है; और समीकरण में उपस्थित राशियों के रूपान्तरण के नियमानुसार समीकरण का सहपरिवर्ती होना स्पष्ट है।
सांतत्य समीकरण का सहप्रसरण
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पूर्वोक्त से लिखा गया है, इसपर कोई विशेष चर्चा नहीं है।
हम समीकरणों के सहप्रसरण का भी परीक्षण करेंगे जो पदार्थ के गुणों पर प्रतिबल के घटकों की निर्भरता को व्यक्त करती हैं और सहप्रसरण की शर्तों के साथ संपीड्य शायन तरल की स्थिति में इन समीकरणों के लिए को स्थापित करेंगे। यदि हम श्यानता को नगण्य मानें तब दाब अदिश होगा और इसका मान केवल तरल के घनत्व एवं ताप पर निर्भर होगा। तब प्रतिबल प्रदिश में इसका योगदान
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है जिसमें विशिष्ट सममित प्रदिश है। यह व्यंजक श्यान तरल की स्थिति में भी उपस्थित होगा। लेकिन उस स्थिति में यहाँ दाब का व्यंजक भी होगा जो की प्रवणता (दिक् अवकलन) पर निर्भर होगा। हम मानते हैं कि यह निर्भरता रैखिक है। चूँकि ये पद सममित प्रदिश होने चाहिए, वो ही इसमें सम्मिलित होंगे
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(जो के लिए अदिश है)। भौतिक कारणों (बिना फिसलन के) से