पृथ्वी के सापेक्ष गति की समीकरण लिखते समय हमें पृथ्वी के घूर्णन को ध्यान में रखना चाहिए। अतः यह दिखाई देता है कि यदि कार्तीय निर्देश तंत्र अथवा तथाकथित जड़त्वीय (inertial) निर्देश तंत्र उपस्थित है तो उसमें यांत्रिकी के नियमों (अधिक व्यापक रूप में भौतिकी के नियमों) को सरलतम रूप में व्यक्त किया जाता है। हम निम्नलिखित प्रमेय की वैधता पर निष्कर्ष निकाल सकते हैं: यदि एक जड़त्वीय निर्देश तंत्र है तब के सापेक्ष घूर्णन रहित, समान गति से गतिशील अन्य निर्देश तंत्र जड़त्वीय निर्देश तंत्र होगा; सभी जड़त्वीय निर्देश तंत्र प्रकृति के नियम संवादित (समान) रहते हैं। इस कथन को हम "विशिष्ट आपेक्षिकता का सिद्धान्त" (principle of special relativity) कहेंगे। जैसे हमने दिशा की सापेक्षिकता के साथ देखा वैसे ही "स्थानान्तरण की आपेक्षिकता" (relativity of translation) कुछ निश्चित परिणाम निकालेंगे।
यह करने के क्रम में हमें पहले निम्नलिखित समस्या हल करनी चाहिए। यदि हमें किसी जड़त्वीय निर्देश तंत्र के सापेक्ष किसी घटना के कार्तीय निर्देशांक और समय दिये गये हैं तो हम के सापेक्ष समान स्थानान्तरण गति से गतिशील किसी अन्य जड़त्वीय निर्देश तंत्र के सापेक्ष समान घटना के निर्देशांक और समय की गणना कैसे कर सकते हैं? आपेक्षिकता से पूर्व की भौतिकी में यह समस्या अनजाने में दो परिकल्पनाओं के साथ हल की जाती थी :—
1. समय निरपेक्ष है; निर्देश तंत्र में प्रेक्षित समय , अन्य निर्देश तंत्र के समय के समान होगा। यदि ताक्षणिक सिग्नल (instantaneous signals) दूरी पर भेजा सकता है और यदि कोई यह जानता है कि घड़ी की गति की अवस्था पर इसकी दर पर कोई प्रभाव नहीं है तब यह धारणा भौतिक रूप से स्थापित हो जाती है। तब घड़ियाँ एक दूसरे के समरूप