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पृष्ठ:The Meaning of Relativity - Albert Einstein (1922).djvu/४४

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आपेक्षिकता का अर्थ

विशिष्ट आपेक्षिकता में प्रकाश के वेग की नियमितता के सिद्धान्त के अर्थ यह अद्वितीय है।

यहाँ तक हम दो जड़त्वीय निर्देश तंत्रों K और K′ के सापेक्ष भौतिक रूप से परिभाषित दिक् और काल के बारे में सोचते हैं जिस तरह यह दर्शाया गया है। इसके आगे माना कि प्रकाश की किरण निर्देश तंत्र K के बिन्दु P1 से होते हुये अन्य बिन्दु P2 तक निर्वात में चलती है। यदि इन दोनों बिन्दुओं के मध्य मापन की हुई दूरी r है तब प्रकाश का संचरण निम्नलिखित समीकरण के अनुसार होना चाहिए

r=c.Δt.

यदि हम इस समीकरण का वर्ग करके r2 को निर्देशांको Δxν के अन्तर के रूप में लिखने पर उपरोक्त समीकरण को हम निम्नलिखित रूप में लिख सकते हैं

∑(Δxν)2−c2Δt2=0

(22)

यह समीकरण K के सापेक्ष प्रकाश के वेग के नियमितता के सिद्धान्त को सूत्रित करता है। यह समीकरण प्रकाश की किरण उत्सर्जित करने वाले स्रोत की गति के सभी मानों के लिए मान्य है।

प्रकाश का समान संचरण K′ के सापेक्ष भी माना जा सकता है जिसकी स्थिति में प्रकाश के वेग की नियमतितता का सिद्धान्त लागू होता है। अतएव K′ के सापेक्ष हमारे पास उपस्थित समीकरण निम्नलिखित है

∑(Δxν′)2−c2Δt'2=0

(22अ)

समीकरण (22अ) और (22) K से K′ में रूपान्तरण के सापेक्ष एक दूसरे के सापेक्ष पारस्परिक से एकरूप होने चाहिए। इसको प्रभावित करने वाले प्रभावों को हम "लोरेन्ट्ज़ रूपान्तरण" (Lorentz transformation) कहेंगे।

इन रूपान्तरणों पर विस्तार से विचार करने से पहले हम