(घटना) है जो चतुर्विम समष्टि में से निरूपित किया जाता है तब वो सभी "बिन्दु" जो प्रकाश सिग्नल द्वारा से जुड़ सकते हैं वो सभी शंकु पर होंगे (चित्र 1, जिसमें विमा को नहीं दिखाया गया है, उससे तुलना करें)। शंकु का "उपरी" आधा भाग उन "बिन्दुओं" को शामिल करता है जिनपर से सिग्नल भेज सकते हैं; शंकु के "नीचले" भाग में स्थित "बिन्दुओं" से कोई भी प्रकाश सिग्नल बिन्दू पर भेजा जा सकता है। शांकव पृष्ठ में शामिल बिन्दुओं को बिन्दु के साथ जोड़ने पर हमें का ऋणात्मक मान प्राप्त होता है; अतः और इसी तरह काल (समय) की प्रकृति के अनुसार मिंकोव्स्की हैं। इस तरह के अंतराल गति के सम्भव पथ को निरूपित करते हैं जहाँ का वेग प्रकाश के वेग से कम है।[१] इस स्थिति में जड़त्वीय निर्देश तंत्र की गति की अवस्था के उपयुक्त चयन के साथ -अक्ष को के अनुदिश आरेखित कर सकते हैं। यदि "प्रकाश-शंकु" के बाहर स्थित हो तब की दिक् की प्रकृति होगी; इस स्थिति में जड़त्वीय निर्देश तंत्र का सही चुनाव के मान को शून्य कर सकता है।
काल से सम्बंधित चर को काल्पनिक संख्या के रूप में लिखने पर, मिंकोव्स्की का किसी भौतिक घटना का चतुर्विम सांतत्यता में निश्चरों का सिद्धान्त पूर्णतः यूक्लिडीय समष्टि के त्रिविम सांतत्यता के निश्चरों के सिद्धान्त के अनुरूप होता है। अतएव विशिष्ट आपेक्षिकता के चतुर्विम में प्रदिशों का सिद्धान्त, त्रिविम समष्टि में प्रदिशों के सिद्धान्त से विमाओं की संख्या और आपेक्षिकता के संबंधों के आधार पर अलग होता है।
- ↑ पदार्थ का वेग प्रकाश के वेग से अधिक होना सम्भव नहीं है; यह विशिष्ट लोरेन्ट्ज़ रूपान्तरण (29) में हरात्मक व्यंजक के आने का परिणाम है।