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यदि निर्देश तंत्र के सापेक्ष कोई चुम्बकीय क्षेत्र है लेकिन विद्युत् क्षेत्र नहीं है अर्थात् विद्युत् क्षेत्र का मान शून्य है तब अन्य निर्देश तंत्र के सापेक्ष विद्युत् क्षेत्र का मान शून्यतर होगा जो निर्देश तंत्र में विरामावस्था में स्थित विद्युत् कण पर कार्य करेगा। निर्देश तंत्र के सापेक्ष विरामावस्था में कोई प्रेक्षक बल की गणना बायो-सावर्ट बल (Biot-Savart force) अथवा लोरेन्ट्ज़ वोद्युत् वाहक बल (Lorentz electromotive force) कहेगा। अतएव यह देखा जा सकता है कि यदि विद्युत् वाहक बल को विद्युत् क्षेत्र की तीव्रता के साथ एक ही राशि में समाहित किया जा सकता है।
सूत्र के रूप में इस सम्बंध को देखने के क्रम में माना कि विद्युत् के इकाई आयतन लगने वाला बल का व्यंजक,
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है जिसमें विद्युत् का सदिश वेग है, इसकी इकाई प्रकाश के वेग के साथ है। यदि हम समीकरण (30अ) और (31) के अनुसार और लिखते हैं तो हम समीकरण के पहले घटक को निम्नलिखित व्यंजक के रूप में प्राप्त करते हैं
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प्रदिश () की प्रति-सममित प्रवृत्ति के कारण का मान शून्य प्राप्त होता है, के घटक चतुर्विम सदिश के पहले तीन घटकों से लिखे जा सकते हैं
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और चौथा घटक इस तरह लिखा जाता है
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