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पृष्ठ:The Meaning of Relativity - Albert Einstein (1922).djvu/६०

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आपेक्षिकता का अर्थ

द्रव्यमान और ऊर्जा। चतुर्विम सदिश Kμ के अस्तित्व और सार्थकता से एक महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निकाला जा सकता है। हम एक ऐसे पिंड की कल्पना करते हैं जिसपर कुछ समय के लिए विद्युत्-चुम्बकीय क्षेत्र कार्य करता है। प्रतीकात्मक चित्र (Fig. 2) में x1-अक्ष को Ox1  को निरूपित करते समय तीन दिक्-अक्षों के तुल्य Ox1,Ox2,Ox3 हैं; Ol वास्तविक समय अक्ष को निरूपित करता है। चित्र में किसी निश्चित समय l के लिए एक पिंड की निश्चित सीमा को अंतराल AB से निरूपित किया गया है; पिंड का सम्पूर्ण दिक्-काल में अस्तित्व को एक पट्टी द्वारा दर्शाया गया है जिसकी सीमायें सभी स्थानों पर l-अक्ष से 45° से कम झुका हुआ हैं। पट्टी के समयांतराल l=l1 और l=l2 के मध्य के कुछ भाग को छायांकित किया गया है। यह दिक्-काल प्रसमष्टि (मेनीफोल्ड) के कुछ भाग को निरूपित करता है जिसमें विद्युत्-चुम्बकीय बल पिंड पर अथवा इसके अन्दर विद्यमान विद्युत् आवेशों पर काम करता है, इसका प्रभाव पिंड पर पड़ता है। अब हम इस क्रिया के प्रभाव से पिंड के संवेग और ऊर्जा पर प्रभाव डालने वाले आवेशों पर विचार करेंगे।

हम मान लेते हैं कि पिंड के लिए संवेग और ऊर्जा के सिद्धान्त वैध हैं। संवेग में परिवर्तन ΔIx,ΔIy,ΔIz और ऊर्जा में परिवर्तन ΔE निम्नलिखित समीकरणों से लिखे जाते हैं

ΔIx=l0l1dl𝐤xdxdydz=1𝐢K1dx1dx2dx3dx4ΔE=l0l1dlλdxdydz=1𝐢1𝐢K4dx1dx2dx3dx4