चूँकि आयतन का चतुर्विम निष्पति निश्चर है और चार विमीय सदिश है, छायाकित भाग के चतुर्विम समाकलन का रूपान्तरण भी चतुर्विमम में होगा, इसी तरह सीमा और के मध्य भी यह चतुर्विम होगा क्योंकि वो भाग जिसे छायांकित नहीं किया गया है वो समकलन में कोई योगदान नहीं दे रहा। अतएव इससे स्पष्ट होता है कि चतुर्विम सदिश का निर्माण करता है। चूँकि राशियाँ अपने आप को उसी तरह रूपान्तरित कर रही हैं जैसे उनमें होने वाली वृद्धि का प्रभाव होता है, इस तरह चारों राशियों को साथ में इस तरह लिख सकते हैं
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जो अपने आप में सदिश गुण रखती हैं; ये राशियाँ निकाय की तात्कालिक स्थिति को निरूपित करती हैं (उदाहरण के लिए )।
चतुर्विम को निकाय के द्रव्यमान और वेग के व्यंजक में भी लिखा जा सकता है, जहाँ निकाय को द्रव्य कण के रूप में माना जाता है। यह व्यंजक लिखने के लिए पहले हम देखते हैं कि
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निश्चर राशि है जो द्रव्य कण की गति को निरूपित करने वाली चतुर्विम रेखा के अत्यल्प लघु भाग को निरूपित करती है। निश्चर राशि की भौतिक सार्थकता सरलता से समझी जा सकती है। यदि समय अक्ष को इस तरह चुना जाता है कि इसकी दिशा हमारी मानी गई दिशा से भिन्न है, अथवा अन्य शब्दों में यदि हम द्रव्य कण को विरामावस्था में ले आते हैं तब हमें प्राप्त होता है; अतएव इसका मापन प्रकाश-सेकण्ड घड़ी से किया जाता है जो उसी स्थान पर है और द्रव्य कण के सापेक्ष विराम में है। अतएव हम
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