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हम वास्तव में मानते हैं कि गति के ये घटक प्रकाश के वेग की तुलना में लघु वेगों के लिए चिरसम्मत यांत्रिकी के घटकों के समान होते हैं। वेग के बड़े मानों के लिए संवेग का मान वेग के साथ रैखिक रूप से बढ़ने की तुलना में बहुत अधिक बढ़ जाता है, इस तरह प्रकाश के वेग के तुल्य वेग पर संवेग का मान अनन्त होने लगता है।
यदि हम समीकरणों (43) की अन्तिम समीकरण को द्रव्य कण पर विरामावस्था () में लागू करते हैं, तब हम देखते हैं कि विरामावस्था में पिण्ड की ऊर्जा इसके द्रव्यमान के तुल्य होगा। यदि हम समय की गणना सेकण्ड में करते हैं तो हमें यह समीकरण प्राप्त होता है
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अतः द्रव्यमान और ऊर्जा अनिवार्य रूप से समान ही हैं; वो एक ही राशी के लिए भिन्न व्यंजक हैं। पिण्डका द्रव्यमान नियत नहीं है; यह ऊर्जा में परिवर्तन के साथ परिवर्तित होता है[१] हम समीकरणों (43) के अंतिम समीकरण में देखते हैं कि अनन्त हो जाता है जब का मान 1 की तरफ अग्रसर होता है जो कि प्रकाश का वेग है। यदि हम को की घातों में लिखते हैं तो हमें यह समीकरण प्राप्त होती है
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- ↑ रेड़ियोधर्मी प्रक्रियाओं में ऊर्जा का उत्सर्जन स्पष्ट रूप से इस तथ्य से जुड़ा हुआ है कि परमाणु भार पूर्णांक नहीं होते हैं। परमाणु नाभिक की संरचना और स्थिरता के संबंध में इससे निष्कर्ष निकालने का प्रयास किया गया है।