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पृष्ठ:The Meaning of Relativity - Albert Einstein (1922).djvu/६४

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आपेक्षिकता का अर्थ

इस व्यंजक का दूसरा पद चिरसम्मत यांत्रिकी में द्रव्य कण की गतिज ऊर्जा के अनुरूप है।

द्रव्य कणों की गति के समीकरण। समीकरण (43) को समय सापेक्ष अवकलित करते हुये, संवेग के सिद्धान्त के उपयोग कर त्रिविम सदिश में लिखने पर

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यह समीकरण पहले एच॰ ए॰ लोरेन्ट्ज़ ने इलेक्ट्रॉनों की गति के लिए उपयोग की थी जिसे -किरणों के साथ प्रयोगों द्वारा सटीकता के साथ सत्य सिद्ध किया गया।

विद्युत्चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्जा प्रदीश। आपेक्षिकता के सिद्धान्त से पहले यह ज्ञात था कि ऊर्जा और गति के सिद्धान्तों को विद्युत्चुम्बकीय क्षेत्र के लिए अवकल रूप में लिखा जा सकता है। इन सिद्धान्तों का चतुर्विम सूत्रीकरण ऊर्जा प्रदीश की एक महत्त्वपूर्ण अवधारणा की ओर अग्रसर होता है, जो आपेक्षिकता के सिद्धान्त के आगे के अध्ययन के लिए महत्त्वपूर्ण है।

यदि प्रति इकाई आयतन बल के चतुर्विम सदिश का व्यंजक,

समीकरण (32) के उपयोग से हम व्यंजक को क्षेत्र की तीव्रता के पदों में लिख सकते हैं, कुछ परिवर्तन और क्षेत्र समीकरणों (32) व (33) के पुनर्रावृत्ति उपयोग से हमें निम्नलिखित व्यंजक प्राप्त होता है

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