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१० :: तुलसी चौरा
 


यह एजेन्ट आस-पास के शहरों से विज्ञापन बटोर कर भिजवाया करता। खैर, नुकसान तो हो ही गया उसका।

वेणु काका से पूछकर ही तो तैयार किया था, वह वैवाहिक विज्ञापन। कितनी आकर्षक पंक्तियाँ गढ़ी थीं उन्होंने 'यूरोप के शहर में, कुछ वर्ष तक रहकर, स्वदेश लौट रहे, उच्च शिक्षा प्राप्त बत्तीस वर्षीय कौशिक गोत्रीय युवक के लिए वधू की आवश्यकता है। सुन्दर, सुशील और मृदुभाषिणी कन्या के माता पिता संपर्क करें। लड़की कम से कम बी॰ ए॰ पास हो। फोटो सहित पूर्ण विवरण भेजें।'

एक प्रति पैरिस भी भिजवायी गयी। वेणु काफा की ही सलाह पर तो भिजवाया था।

वेणु काका के बेटा सुरेश, पैरिस स्थित यूनेस्को में अच्छे पद पर कार्यरत हैं। सुरेश पहले यू. एन. ओ. न्यूयार्क में था। फिर तबादले पर पैरिस चला आया। तब से पैरिस में सपरिवार रहता रहा था। जाने कितनी बार लिखता रहा वेणु काका और उनकी बेटी को। चार पाँच महीने पहले तो हवाई टिकट ही भिजवा दिए थे। वेणु काका और उनकी बिटिया को हार कर जाना ही पड़ा। वे लोग लौटे, तो विश्वेश्वर शर्मा के पास रवि की खबर भी लाए।

वेणु काका ने जब सारी बातें बतायीं, शर्मा जी को विश्वास नहीं हुआ। हालांकि वेणु काका ने सूचना देते वक्त पूरी सतर्कता बरती थी। उसमें शिकायत का लहजा कतई नहीं था।

'मैं तो खालिस तुम्हें आगाह करना चाहता था। अब गुस्से में, उसे उल्टा सीधा कुछ मत लिख बैठना, समझे। आजकल के लौंडों को लिखते वक्त भी खूब सोचना पड़ता है। कहीं यह मत लिख बैठना कि काका कह रहे थे कि वहाँ किसी फिरंगिन के चक्कर में पड़े हो। बस इतना लिखना कि इस बार छुट्टियों में जब घर आओगे तो सोचता हूँ, तुम्हारा ब्याह कर दूँ। देखते हैं क्या उत्तर आता है।' शर्मा जी ने दो सप्ताह पहले, इसी आशय का एक पत्र डाल दिया था।