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तुलसी चौरा :: १६३
 

'हिन्दू संस्कृति के इन तमाम साक्ष्यों से अधिक हिन्दुत्व इस कमली में है।'

हमारे संगठन में जब वह भाषण देने आयी थी, उसने सर्वप्रथम ईश्वर की स्तुति की। उसके बाद ही अपना भाषण प्रारम्भ किया।

वकील बीच में कुछ नहीं पूछ पाए। वेणुकाका ने पूरे मुद्दे को ढंग से रखा और उन्हें समझाते हुए अपना तर्क प्रस्तुत किया।

'हिन्दू आचार अनुष्ठानों को या मन्दिर की पवित्रता को हमारे मुवक्किल से कोई खतरा नहीं है। यह मात्र दर्शन लिए श्रद्धालु की तरह गयी थी। यह पूरा केस उन्हें बदनाम करने की नियत से तैयार किया गया है। यहाँ कानूनन् कुछ भी गलत नहीं हुआ हैं। शुद्धीकरण की कोई भी आवश्यकता नहीं है।

कल और आज भी उन्हीं मन्दिरों में पूजा, भजन बाकायदे किये जा रहे हैं यदि ऐसा कुछ हुआ होता और मन्दिर भ्रष्ट हो गया होता तो इसे तो श्रद्धालुभक्तों के लिए बन्द कर दिया जाना चाहिए था। पर ऐसा नहीं किया गया।

प्रतिपक्ष के वकील ने कुछ कहना चाहा। पर न्यायाधीश ने उसे नहीं माना और काका को आगे कहने का आदेश दिया।

'फिर मेरे मुवक्किल ने इन मन्दिरों, संस्थाओं इनसे जुड़े लोगों के समक्ष अपने को श्रद्धालु साबित किया है। यह रसीद देखिए। शिव मन्दिर के पुननिर्माण के लिए आस्तिक हिन्दुओं से ली जाने वाली रसीद है। यह इसमें मन्दिर के धर्माधिकारी के हस्ताक्षर भी हैं। यह कैसा विरोधाभास है, कि इस मुकदमें को दायर करने वालों में यह धर्माधिकारी भी हैं। यदि मेरे मुवक्किल को मन्दिर में प्रवेश करने की योग्यता नहीं है तो अर्द्धमण्डप तक उन्हें प्रवेश की अनुमति देना फिर उन्हें पाँच सौ रुपये की रसीद भी देना……यह सब क्या है। फिर इस रसीद में देखिये ऊपर क्या लिखा है। हिन्दू आस्तिकों से मन्दिर