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लेखक:कबीर

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कबीर
(1440/1398–1518)

पूर्वमध्यकाल (भक्तिकाल) के निर्गुण काव्यधारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के प्रमुख कवि।

कबीर

जीवन परिचय

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कबीर का जन्म 15वीं सदी में हुआ माना जाता है। वे जन्म से मुसलमान जुलाहा परिवार में पले-बढ़े लेकिन उनका चिंतन हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्मों की रूढ़ियों से परे था। उन्होंने मानवता को ही सच्चा धर्म बताया।

कबीर के जीवन में रामानंदाचार्य का प्रभाव माना जाता है। वे ब्रह्म की निर्गुण उपासना में विश्वास करते थे और सगुण मूर्तिपूजा, जातिवाद, और पाखंड का तीव्र विरोध करते थे।

काव्य विशेषताएं

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कबीर का काव्य सरल, सहज और लोकभाषा में है — विशेषतः सधुक्कड़ी। उन्होंने साखी, रमैनी, और सबद के माध्यम से आध्यात्मिक और सामाजिक विषयों पर अपनी वाणी प्रस्तुत की।

उनका काव्य मुख्यतः मौखिक रूप में प्रसारित हुआ और बाद में संग्रहीत किया गया। उनके दो प्रमुख संग्रह हैं – बीजक और कबीर ग्रंथावली