पृष्ठ:अद्भुत आलाप.djvu/१६३

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अद्भुत इंद्रजाल


वह पूर्ववत् उस जगह की तरफ़ टकटकी लगाए देखता रहा। जर्मिन ने पकड़कर उसे हिलाया; पर वह अचल रहा। यह हालत देखकर हम लोग घबरा गए। हम सबने वल-पूर्वक उसे उठाने की कोशिश की, पर हमारी कोशिश व्यर्थ हुई। वह वहाँ से नहीं हिला। तब हम लोगों ने उसकी छाती पर ब्रांडी के छींटे मारे। इस पर वह होश में आया, और सन्निपात-ग्रस्त आदमी की तरह, न-जाने क्या, बर्राने लगा। हम लोगों ने उसे उठाकर बँगले के भीतर लिटाया। हमने उसके कपड़े ढीले कर दिए और सिर के ऊपर पानी की धारा छोड़ी। तब वह बेतरह घबरा उठा, और आश्चर्य-चकित-सा होकर उठ बैठा। चारो तरफ़ देखकर उसने एक अजब सर में कहा---वह कहाँ है? हम सबने उसे बहुत समझाया। हमने कहा, तुम क्या पागल हो गए हो? वह सब इंद्रजाल था; वह सब भ्रम था। परंतु उसने हमारी एक भी बात न सुनी। मैं उसके पास जाना चाहता हूँ; मै वहाँ ज़रूर जाऊँगा; वह गई कहाँ? इस तरह गोरिंग बकने लगा। यह दशा देखकर मेजर ने डॉक्टर को बुलाया। जर्मिन तो फ़ोटो की प्लेटें तैयार करने में लगा, और हम लोग गोरिंग को समझाने में! वह बार-बार उठकर भागने की कोशिश करता और हम लोग बार-बार पकड़कर उसे रोक रखते। इतने में डॉक्टर आया। उसे देख गोरिंग बहुत बिगड़ा। उसने मुझे एक लात मारी। डॉक्टर ने कहा, इसे उन्माद हुआ है। उसने गोरिंग का दस्ताना फाड़कर पिचकारी से एक औषध उसके हाथ में प्रविष्ट कर दी।