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जनवरी की निर्वाचित पुस्तक
निर्वाचित पुस्तक

सप्ताह की पुस्तक
सप्ताह की पुस्तक

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प्राचीन चिह्न महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित ऐतिहासिक ग्रंथ है जिसका प्रकाशन सन् १९२९ ई॰ में प्रयाग के इंडियन प्रेस लिमिटेड द्वारा किया गया था।


"इस संग्रह में जो लेख दिये जाते हैं उनमें से कुछ लेखों में बहुत प्राचीन और बहुत प्रसिद्ध बौद्धकालीन इमारतों, गुफाओं और ऐतिहासिक पदार्थों के वर्णन हैं। छः लेखों में पुराने नगरों, स्थानों और मन्दिरों के संक्षिप्त विवरण देकर उनकी प्राचीन ऊर्ज्जितावस्था का भी उल्लेख किया गया है। जो मन्दिर या स्थान अब तक अस्तित्व में हैं उनके दर्शन तो अब भी होते ही हैं; पर जो नष्ट-भ्रष्ट हो चुके उनकी स्मृति की रक्षा का एकमात्र उपाय अब उनके वर्णन से पूर्ण पुस्तकें ही हो सकती हैं। इसी से ऐसी पुस्तकों की आवश्यकता है जिनमें ऐसे वर्णन पढ़ने को मिल सकें।
इस पुस्तक मे क़ुतुब-मीनार पर भी एक लेख है। उसमें इस बात का भी विचार किया गया है कि वह इमारत कब बनी, किसने बनवाई और वहाँ पर पहले कोई हिन्दू-मन्दिर या इमारत थी या नहीं।..."(पूरा पढ़ें)


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पूर्ण पुस्तक
पूर्ण पुस्तकें

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भ्रमरगीत-सार रामचंद्र शुक्ल द्वारा संपादित पुस्तक है जिसमें सूरदास रचित लगभग ४०० पद संकलित हैं। इसका प्रकाशन बनारस के साहित्य-सेवा-सदन द्वारा १९२६ ई॰ में किया गया था।

पहिले करि परनाम नंद सों समाचार सब दीजो।
और वहाँ वृषभानु गोप सों जाय सकल सुधि लीजो॥
श्रीदामा आदिक सब ग्वालन मेरे हुतो भेंटियो।
सुख-संदेस सुनाय हमारो गोपिन को दुख मेटियो॥
मंत्री इक बन बसत हमारो ताहि मिले सचु पाइयो।
सावधान ह्वै मेरे हूतो ताही माथ नवाइयो॥
सुन्दर परम किसोर बयक्रम चंचल नयन बिसाल।
कर मुरली सिर मोरपंख पीताम्बर उर बनमाल॥
जनि डरियो तुम सघन बनन में ब्रजदेवी रखवार।
बृन्दावन सो बसत निरंतर कबहुँ न होत नियार॥
उद्धव प्रति सब कही स्यामजू अपने मन की प्रीति।
सूरदास किरपा करि पठए यहै सकल ब्रज रीति॥१॥

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सहकार्य

इस माह प्रमाणित करने के लिए चुनी गई पुस्तक:
  1. हिंदी रस गंगाधर.djvu ‎[४२८ पृष्ठ]
इस माह शोधित करने के लिए चुनी गई पुस्तक:
  1. स्वाधीनता.djvu ‎[३२८ पृष्ठ]
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रचनाकार
रचनाकार

जयशंकर प्रसाद
Jaishankar Prasad.jpg
जयशंकर प्रसाद (३० जनवरी १८८९ - १५ नवंबर १९३७), हिंदी के कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा निबन्धकार थे। विकिस्रोत पर उपलब्ध उनकी रचनाएँ :
  1. स्कंदगुप्त – १९२८ - गुप्तकाल के अंतिम प्रसिद्ध शासक पर आधारित ऐतिहासिक नाटक।
  2. एक घूँट - १९२९ - हिंदी की प्रथम एकांकी।
  3. आकाशदीप - १९२९ - १९ कहानियों का संग्रह।
  4. ध्रुवस्वामिनी - १९३५ - क्लीव पति से विवाहित हिंदू स्त्री के मुक्ति की गाथा पर आधारित नाटक।
  5. कामायनी – १९३६ - जल-प्लावन की गाथा पर आधारित आधुनिककालीन हिंदी का सबसे लोकप्रिय महाकाव्य।
  6. काव्य और कला तथा अन्य निबन्ध - १९३९ - ८ निबंधों का संग्रह।
  7. आँधी - १९५५ - ग्यारह कहानियों का संग्रह।
मोहनदास करमचंद गाँधी

मोहनदास करमचन्द गाँधी (२ अक्टूबर १८६९ - ३० जनवरी १९४८) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत, दार्शनिक, लेखक एवं पत्रकार थे। विकिस्रोत पर उपलब्ध उनकी रचनाएँ:—

  1. हिन्द स्वराज्य – १९०७, गाँधी-दर्शन की पहली सैद्धांतिक पुस्तक।
  2. सत्य के प्रयोग - १९४८, आत्मकथा।
  3. रामनाम - १९४९, गाँधी के विचारों का संग्रह।

विकिस्रोत पर उपलब्ध सभी लेखकों के लिए देखें- समस्त रचनाकार अकारादि क्रम से।


आज का पाठ

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राणा प्रताप प्रेमचंद द्वारा रचित १५ महापुरुषों के जीवन-चरित संग्रह कलम, तलवार और त्याग का एक अध्याय है। इसका पहला संस्करण १९३९ ई॰ में बनारस के सरस्वती-प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया था।


"राणा की टकटकी दीवार की ओर लगी हुई थी और कोई खयाल उसे बेचैन करता हुआ मालूम होता था। एक सरदार ने कहा—महाराज, राम नाम लीजिए। राणा ने मृत्यु-यन्त्रणा से कराहकर कहा—'मेरी आत्मा को तब चैन होगा कि तुम लोग अपनी-अपनी तलवारें हाथ में लेकर कसम खाओ कि हमारा यह प्यारा देश तुर्कों के कब्जे में न जायगा। तुम्हारी रगों में जब तक एक बूँद भी रक्त रहेगा, तुम उसे तुर्कों से बचाते रहोगे। और बेटा अमरसिंह, तुमसे विशेष विनती है कि अपने बाप दादों के नाम पर धब्बा न लगाना और स्वाधीनता को सदा प्राण से अधिक प्रिय मानते रहना। मुझे डर है कि कहीं विलासिता और सुख की कामना तुम्हारे हृदयों को अपने वश में न कर ले और तुम मेवाड़ की उस स्वाधीनता को हाथ से खो दो, जिसके लिए मेवाड़ के वीरों ने अपना रक्त बहाया।' संपूर्ण उपस्थित सरदारों ने एक स्वर से शपथ की कि जब तक हमारे दम में दम है, हम मेवाड़ की स्वाधीनता को कुदृष्टि से बचाते रहेंगे। प्रताप को इतमीनान हो गया और सरदारों को रोता-बिलखता छोड़ उसकी आत्मा ने पार्थिव चोले को त्याग दिया। मानो मौत ने उसे अपने सरदारों से यह कसम लेने की मुहलत दे रखी थी।..."(पूरा पढ़ें)


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