पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/१३५

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मालम केलि "अर-+- थोरी यार है जुकछु थोगे सो में ताकि आई,..: ओरो-सो पिलाइ कहीं सिन ही में :सोहगो। धीरज, अधार-ते रहो है - खंग' धार जैसो, : . • आँमुन की धार सो न धूरि है तु: धोइगो । पाहि सुनि आई यौन चाहि ताहि पाई फेरि, । देखि 'सेख' मजनूं बिना, हो नौद सांहगो । नोकै केनिहारि वाके यसननि झारि :डारि, तार तार ताकि कहूँ यार, सो जु· होइगो ॥२७३॥ . ":..." in; :: :: 5" : 1 मवैया .. } --२९ट. - .: लई छलु के हरि हेत, हला मिलई, नवला नव-कुंजनि माह 'आलमा यालो-अकेली डरे-हितवैपति जे पतियां चित माहा मुखनाय भरे डग दोन तिया जल छोन में मीन: मनो अकुमार चौक पर चितये चल नीचहि डोलत ज्योपिय की परिहाहा

  • १ ख- सलवार