पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/२६१

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( २४४ ) उदाहरण (१) सवैया मूलनिसों फल फूल सवै, दल जैसी कछू रसरीति चलीजू । भाजन, भोजन, भूषण भामिनि, भौन भरी भव भांति भलीजू ॥ डासन, आसन, वास निवास, सुवाहन यान विमान.थलीजू । केशव कैकै महाजन लोग, मरै भुव, भोगवै न भोग बलीजू ॥५॥ मूल से लेकर फलफूल तक जैसी कुछ आनन्द के साधन प्रचलित है, वे सभी तथा पात्र, भोजन गहने, तथा भलीभाँति भावो से भरी हुई गृह-पत्नी शैय्या, आसन, सुगन्ध, घर, सुन्दर विमानादि सवारियाँ आदि को ( केशवदास कहते हैं कि ) एकत्र कर करके महाजन मरते है और उनका उपभोग कोई बलवान करता है । उदाहरण (२) छप्पय सरघा सॅचि सॅचि मरै, शहर मधु पानकरत मुख । खनि खनि मरत गॅवार, कूप जल पथिक पियत सुख ॥ बागवान बहिमरत, फूज बाधत उदार नर । पचि पचि मरहि सुआर, भूप भोजननि करत वर ॥ भूषण सुनार गढ़ि गढि मरहि, भामिनी नूषित करन तन । कहि केशव लेखक लिखिमरहिं पंडित पढ़हिं पुराणगन ॥६॥ ___ मधु मक्खी तो शहद इकट्टा कर करके मरती है और शहर के लोग सुख पूर्वक उसका मधु पीते हैं । गॅवार तो कुआँ खोद खोदकर मरते हैं और पथिक आनन्दित होकर उसका पानी पीते है । बागवान फल फूल लगाकर मरता है और फूलो को उदार पुरुष बांधते हैं । रसोईया पकवान बना बनाकर मरता है और राजा उन्हे खाते है ।