पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/३६०

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धाम, धरै, धन, राज, हरै, तब, बानि, विये, मति, दान, लहै, दुख ।राम,ररै,मन,काज,सरै,सब,हानि,हिये,अति,आन,कहै,सुख ॥८॥

हारबन्ध

दोहा

हरि हरि हरि ररि दौरि दुरि, फिरि फिरि करि करि आर । मरि मरि जरि जरि हारि परि, परि हरि अरि तरि तारि ॥६

हारबन्ध

MERar Hb | 1 काकाकाकाका 8 प्रे 4