पृष्ठ:कुछ विचार - भाग १.djvu/९३

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जाती है, यहाँ तक कि खुद नादिरशाह के मुँहलगे अफसर भी उसके सामने आने का साहस नहीं करते, तो वह हथेलियों पर जान रखकर नादिरशाह के पास पहुँचा और यह शेर पढ़ा- ___ 'कसे न माँद कि दीगर ब तेरो नाज़ कुशी। मगर कि जिन्दा कुनी खल्क रा व बाज कुशी।' इसका अर्थ यह है कि तेरे प्रेम की तलवार ने अब किसी को जिन्दा न छोड़ा। अब तो तेरे लिए इसके सिवा और कोई उपाय नहीं है कि तू मुर्दो को फिर जिला दे और फिर उन्हें मारना शुरू करे । यह फ़ारसो के एक प्रसिद्ध कवि का शृंगार-विषयक शेर है ; पर इसे सुनकर क़ातिल के दिल में मनुष्य जाग उठा। इस शेर ने उसके हृदय के कोमल भाग को स्पर्श कर दिया और क़तलाम तुरन्त बन्द कर दिया गया। मेपोलि- यन के जीवन की यह घटना भी प्रसिद्ध है, जब उसने एक अंग्रेज़ मल्लाह को झाऊँ की नाव पर कैले का समुद्र पार करते देखा । जब फ्रांसीसी अपरावी मल्लाह को पकड़कर, नेपोलियन के सामने लाये और उसने पूछा-तू इस भंगुर नौका पर क्यों समुद्र पार कर रहा था, तो अपराधी ने कहा-इसलिए कि मेरी वृद्धा माता घर पर अकेली है, मैं उसे एक बार देखना चाहता था । नेपालियन की आँखों में आँसू छल- छला आये। मनुष्य का कोमल भाग स्पन्दित हो उठा। उसने उस सैनिक को फ्रांसीसी नौका पर इंगलैंड भेज दिया। मनुष्य स्वभाव से देवतुल्य है। जमाने के छल-प्रपञ्च, या और परिस्थितियों के वशीभूत होकर वह अपना देवत्व खो बैठता है। साहित्य इसी देवत्व को अपने स्थान पर प्रतिष्ठित करने की चेष्टा करता है-उपदेशों से नहीं, नसी- हतों से नहीं, भावों को स्पन्दित करके, मन के कोमल तारों पर चोट लगाकर, प्रकृति से सामंजस्य उत्पन्न करके । हमारी सभ्यता साहित्य पर ही आधारित है। हम जो कुछ हैं, साहित्य के ही बनाये हैं । विश्व की आत्मा के अन्तर्गत भी राष्ट्र या देश की एक आत्मा होती है। इसी आत्मा की प्रतिध्वनि है-साहित्य । योरप का साहित्य उठा लीजिए। आप वहाँ संघर्ष पायेंगे। कहीं खूनी काण्डों का प्रदर्शन है, कहीं