पृष्ठ:खूनी औरत का सात ख़ून.djvu/१२१

विकिस्रोत से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

सात खून ANANrvNrvNAV Vvvvv vivah उनसे यहां जाने का सब पूछा गया, तब उन्होंगे यों कहा कि,- " गाज एक पार दिन बढ़ते पढ़ते एक मौजशम भौर निहायत हसीन लड की रसूलपुर के थाने पर पहुंखी गौर इसने मुझसे यों कहा कि, “मेरे घर में रात को पांच खूम होगए हैं, उनकी रिर्ट भाप लिन लीजिए।" यों कहकर उस औरत ने एक नजीबोगरोष दास्तान कह सुनाई ! खस, उम मौरत की अनोखी बात सुनकर मैंने उसे को घही एक कोरी में बंद कर के उप के पहरे का काफी इन्तजाम कर दिया और हींगन चौकीदार के साथ याक लिये फौरन कूच किया । यह नौजवान लड़की या भौरत अपना नाम दुलारी बताती है।" स्य, दुल्लारखां की यानी या हाल सुमकर हमलोगों ने गौर के साथ फिर उस घर को, जिसमें कि बार हाशें पड़ी हुई थीं, मच्छी तरह देखा, तो पया देखा कि हम घर से लेकर बाहर भांगन तक छोटे छोटे पओ (पैर ) के गिशाम पड़े हुए हैं ! उन मिशानों को देखकर अबदुल्ला ने जो कहा कि, 'गालियग यह उसी लड़की दुलारी के पैर के निशान होंगे, पोंकि उसके पैर की ही छोटे और नाजुक हैं।' इस बात को साह बहादुर में भाग लिया और हमलोगों गे यही गुमान किया कि 'उस पहातुर लड़की में एक कोठरी में एफ शरूस को गला घोंट हर मार डाला। फिर वह दूसरी कोठरी में बार-बार भादमियों को कारफर खुद रिर्पोट करने रसूलपुर के थाने पर पहुंची है!!!. मगर, खैर। फिर तो यह बात हीक समाली गई कि यह छोटे पों के निशान दुलारी के पैर के ही हैं; क्योंकि फळगू ने भी गए। बयान में ऐसा ही कहा है । बल, इसके बाद साहब बहादुर ने भवदुल्ला को पह हुफा देकर फौरन रुमसत किया कि, “कम इस मौरत को कानपुर की कोतवाली में माहिर करों। और एनके जाने पर मुझसे यों कहा कि,-" फलगू-वगैरह इग तीगों को गभी कानपुर की फोतवाली में ले जाफर रनगा चाहिए । appen WERE