पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/११५

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गुप्त-निबन्धावली चरित-चर्चा पहुंचाया। अब यही किताब पंजाबके इब्तदाई स्कूलोंमें पढ़ाई जाती हैं। उको पहिली और दूसरी किताब जो आजादने तालीफ़की२१ पहिली बार लन्दनसे छपकर पंजाबमें आई। यह बातसबीर थीं। बातसबीर उर्दू किताबोंका सिलसिला तबहीसे पंजाबी स्कूलोंमें जारी हुआ। इस सिलसिलामें अब आठ किताब हैं। पहिली चार आजादने खुद लिखी और पिछली चार दूसरोंने। दूसरे लोगोंने भी आजादकी पूरी-पूरी नकल की है। ताहम उनमें अंग्रेजीकी कचाहन्द बुरी तरह मालूम होती है। साफ अंग्रेजीका तरजमा मालूम होती हैं। उनके बाज़ मजामीन तो ज्योंके त्यों अंग्रेज़ी मालूम होते हैं, जिनमें उर्दूपन आया ही नहीं। ___ इसी तरह फारसी सीखनेके लिये आज़ादकी फारसीकी पहिली और दूसरी किताबके मुक़ाबिलेकी किताब हिन्दुस्तान भरमें कहीं नहीं हैं। यह दोनों किता इस खूबसूरतीसे लिग्बी गई हैं, कि इनके पढ़नेके माथ-साथ कवायद फारसीकी सीधी-सीधी बात भी मालूम होती जाती हैं। यह दो किताब पढ़ लेनेसे लड़के सादीकी गुलिस्तां पढ़नेके लायक हो जाते हैं, और इन किताबोंके बाद गुलिस्तां ही पंजाबी स्कूलों में शुरू कराई जाती है। ऐसी किताब हिन्दुस्तानके दूसरे सूबोंके स्कूलों में मयस्सर नहीं है। आज़ादकी खास खबी आज़ादमें यह एक खास वम्फ२२ है कि वह जिस कलमसे आलासे आला दर्जेकी बात लिख सकता है, उसीसे अदनासे अदना दर्जेकी भी लिख सकता है । वह उड़े तो आसमानके तारे तोड़ ला सकता है, और नीचेकी तरफ जाय तो समुन्दरकी काई निकाल ला सकता है। उसका वही कलम आबेहयात' और 'नैरंगे खयाल' लिखकर उर्दू के फजला ०१-बनाई। २२-विशेषता। [ ९८ ]