पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/५

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सार आज परिवर्द्धित रूपमें यह “गुप्त-निबन्धावली" भेंट की जाती है। इसमें चरित-चर्चा, राष्ट्रभाषा और लिपि, शिवशंभुके चिढ़े और खत, संवाद-पत्रोंका इतिहास, आलोचना-प्रत्यालोचना एवं स्फुट कविता, शीर्षक छै प्रकरणोंमें गुप्तजीके गद्य-पद्यात्मक मुख्य मुख्य लेखों तथा कविताओंका समावेश करनेका प्रयत्न किया गया है। खेद है कि आकार बहुत बढ़ जानेके कारण हमें कितने ही लेख द्वितीय भागके लिये रख लेने पड़े हैं। उनके साथ हम गुप्तजीके चुने हुए कुछ उर्दू गद्य-पद्यमय लेखोंको भी सम्मिलित करना चाहते हैं। यदि कोई सज्जन कृपया उनकी प्राप्तिमें सहायता देंगे तो हम उनके कृतज्ञ होंगे। गुप्तजीके लेख तथा कविताएँ सन् १८८५ ई० से सन १९०७ तकके जिन प्रसिद्ध उर्दू पत्रोंमें प्रकाशित होती रहीं, उनके नाम ये हैं :-अवधपंच, अखबारे चुनार, कोहेनूर, रहबर, विकोरिया गजट, भारत प्रताप, मखजन, उर्दू-ए-मोअल्ला और जमाना आदि । इस समय हिन्दी राष्ट्रभाषा-पदारूढ़ होरही है। गुपजी हिन्दीके एक ख्यातनामा निर्माता एवं उन्नायक थे। उनकी रचनाओं में सन १८६० से सन् १९०७ ई० तकका हिन्दीके विकासका इतिहास सुरक्षित है । अतएव आशा है, हिन्दीके हितचिन्तक और विशेषकर शिक्षार्थी प्रस्तुत "गुप्त-निबन्धावली” से लाभ उठायंगे। हाँ, एक विशेष निवेदन है, स्वगीय गुमजी बहुवचनमें भी 'वे' की जगह 'वह' का प्रयोग करते थे और अक्षरोंके नीचे बिन्दी (नुक्ता ) नहीं लगाते थे। इसलिये उनकी रचनाओंमें हमें उनके नियमोंका विचार रखना पड़ा है । प्रूफ पढ़नेवालोंकी अनवधानता और दृष्टिदोषसे पुस्तकमें जहां तहां प्रूफ सम्बन्धी कितनी ही भूलं भो रह गई हैं, इसके लिये भी हम क्षमाप्रार्थी हैं। गांधी-भवन कुण्डेश्वर, टीकमगढ़ झाबरमल्ल शर्मा २७-१२-४६ ई० बनारसीदास चतुर्वेदी विनीत