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पृष्ठ:न्याय.pdf/४१

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कोकसन

[खज़ांची से, जो देखने में, घुड़सवार पलटन का एक आलसी सिपाही सा मालूम होता था]

गुडमार्निङ्ग!

[वाल्टर से]

आपके अब्बाजान कहाँ हैं?

[वाल्टर मालिकों के कमरे की ओर चला जाता है]

कोकसन

मिस्टर कौली, बात तो छोटी है पर है बड़ी भद्दी। मुझे शर्म आती है कि इसके लिए आपको कष्ट देना पड़ा।

कौली

मुझे वह चेक ख़ूब याद है। उसमें कोई ख़राबी नहीं थी।

कोकसन

ख़ैर, आप बैठिए तो। मैं ऐसा आदमी तो नहीं हूँ कि ज़रा सी बात में घबड़ा जाऊं लेकिन इस तरह का

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