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[ Part I Ch. 3
परमार्थसोपान



8. NANAK ON THE UNITY OF THE INTERNAL
AND THE EXTERNAL GOD.



काहे रे बन खोजन जाई ॥ टे॥

सर्व निवासी सदा अलोपा,
तोहे संग समाई ॥ १ ॥

पुष्प मध्य जिमि वास बसत है,
मुकुर मँह जैसे छाई ॥ २ ॥

तैसे ही हरि बसै निरंतर
घट ही खोजो भाई ॥ ३ ॥

बाहर भीतर एकहि जानो,
यह गुरु ज्ञान बताई ॥ ४ ॥

कह नानक बिनु आपहिं चीन्हे
मिटै न भ्रम की काई ॥ ५ ॥