पृष्ठ:प्रेम-पंचमी.djvu/७७

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राज्य-भक्त

ही घरों में चूल्हा जलने की नौबत नहीं आती। सिपाहियों को अभी तक तनख्वाह नहीं मिली। वे जाकर दूकानदारों को लूटते हैं। सारे राज्य में वद-अमली हो रही है। मैने कई बार यह कैफि- यत बादशाह सलामत के कानो तक पहुँचाने की कोशिश की; मगर वह यह तो कह देते हैं कि मैं इसकी तहकीकात करूँगा, और फिर बेखबर हो जाते हैं। आज शहर के वहुत-से दूकानदार फरियाद लेकर आए थे कि हमारे हाल पर निगाह न की गइ, तो हम शहर छोड़कर और कही चले जायँगे। क्रिस्तानों ने उनका सख्त कहा, धमकाया; लेकिन उन्होंने जब तक अपनी सारी मुसीबत न बयान कर ली, वहाँ से न हटे। आख़िर, जब बादशाह सलामत ने उनको दिलासा दिया, तब कहीं गए।

राजा―बादशाह पर इतना असर हुआ, मुझे तो यही ताज्जुब है!

कप्तान―असर-वसर कुछ नहीं हुआ, यह भी उनकी एक दिल्लगी है। शाम को खास मुसाहबो को बुलाकर हुक्म दिया है कि आज मैं भेष बदलकर शहर का गश्त करूँगा, तुम लोग भी भेष बदले हुए मेरे साथ रहना। मैं देखना चाहता हूँ कि रियाया क्यों इतनी घबराई हुई है। सब लोग मुझसे दूर रहे; किसी को न मालूम हो कि मैं कौन हूँ। रोशनुद्दौला और पाँचो अँगरेज मुसाहब साथ रहेंगे।

राजा―तुम्हें क्योंकर यह बात मालूम हो गई?