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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/९५

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आलोड़ना ८७ वेन आलोड़ना - क्रि० स० १. मधना । २. हिलारना । आल्हा - संज्ञा पुं० १. महोबे के एक वीर का नाम जो पृथ्वीराज के समय में था । २. बहुत लंबा-चौड़ा वर्णन । ३. श्राल्हखंड पुस्तक | आव - संज्ञा स्त्री० श्रायु । आवन-संज्ञा पुं० श्रागमन । श्राना । आवभगत-संज्ञा स्त्री० आदर-सत्कार । आवरण- संज्ञा पुं० १. ढकना । २. वह कपड़ा जो किसी वस्तु के ऊपर लपेटा हो । श्रावत -संज्ञा पुं० १. पानी का भँवर । २. वह बादल जिसमे पानी न बरसे । श्रवतन-सज्ञा पुं० १. चक्कर देना । फिराव | घुमाव । २. मथना । हिलाना | आवश्यक - वि० १. जिसे अवश्य होना चाहिए | ज़रूरी । २. प्रयोजनीय । जिसके बिना काम न चले । आवश्यकता - संज्ञा स्त्री० १. ज़रूरत । अपेक्षा । २. प्रयोजन । मतलब | श्रावश्यकीय - वि० ज़रूरी | श्राव-संज्ञा पुं० गड्ढा जिसमें कुम्हार मिट्टी के बरतन पकाते हैं । आवागमन -संज्ञा पुं० श्राना-जाना । आवाज़ - संज्ञा स्त्री० १. शब्द । ध्वनि । नाद । २. बोली । वाणी । स्वर । श्रवाज़ा - संज्ञा पुं० [फा०] बोली ठोली । ताना | व्यंग्य | आवाजाही | संज्ञा स्त्री० श्राना-जाना । आवारगी - संज्ञा स्त्री० आवारापन | श्रावारजा - संज्ञा पुं० जमा-खर्च की किताब | आवारा - वि० १. व्यर्थ इधर-उधर फिरनेवाला । निकम्मा । २. वे ठौर ठिकाने का । उठल्लू । ३. बदमाश । लुच्चा । आवारागर्द - वि० व्यर्थ इधर-उधर घूमनेवाला । उठल्लू । निकम्मा | श्रावास - संज्ञा पुं० १. रहने की जगह । निवास स्थान । २. मकान । घर । श्रावाहन - संज्ञा पुं० १. मंत्र द्वारा किसी देवता को बुलाने का कार्य्यं । २. निमंत्रित करना । बुलाना । श्रविद्ध - वि० १. छिदा हुभ्रा । भेदा हुआ । २. फेंग हुआ । श्राविष्कर्त्ता - वि० श्राविष्कार करने- वाला । श्राविष्कार - संज्ञा पुं० [वि० आविष्कारक, आविष्कर्त्ता, आविष्कृत] कोई ऐसी वस्तु तैयार करना जिसके बनाने की युक्ति पहले किसी को न मालूम रही हो । श्राविष्कारक - वि० दे० "श्रवि- कर्त्ता" । श्राविष्कृत- वि० १. पता लगाया हुआ । २. ईजाद किया हुआ । श्रावृत - वि० छिपा हुआ । ढका हुआ । श्रावृत्ति - संज्ञा स्त्री० १. बार बार किसी बात का अभ्यास । २. पढ़ना । श्रावेग -संज्ञा पुं० १. चित्त की प्रबल वृत्ति। मन की झोंक । जोश । २. घबराहट । श्रावेदक - वि० निवेदन करनेवाला । आवेदन - संज्ञा पुं० अपनी दशा को सूचित करना । निवेदन | अर्ज़ी | श्रवेदनपत्र - संज्ञा पुं० अरज़ी । श्रावेश- संज्ञा पुं० १. दौरा । २. प्रवेश । ३. जोश । ४. मृगी रोग | ढकने का कार्य्यं । 1. छिपाने या २. छिपाने, पे-