पृष्ठ:मानसरोवर भाग 3.djvu/७१

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vo मानसरोवर पण्डित 1-सच? माया-हाँ, सच कहती हूँ। पण्डित-मेरी कसम माया-तुम्हारे चरण छूकर कहती हूँ। पण्डित-तो तुमने मुमसे कौशल किया था ? माया-हाँ। पण्डित- तुम्हें मालूम है, तुम्हारे कौशल का मुझे क्या मूत्य देना पड़ा ? माया-क्या ६०.) से ऊपर ? पण्डित-बहुत ऊपर ! इसके लिए मुझे अपने आत्मस्वातंत्र्य को बलिदान करना पड़ा है।