पृष्ठ:मेघदूत का हिन्दी-गद्य में भावार्थ-बोधक अनुवाद.djvu/१४

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भूमिका।


कि रघुवंश और कुमारसम्भव के अनुवाद की तरह इस अनुवाद में भी हमने कालिदास के आशय को ही प्रकट करने की चेष्टा की है। आंख मूँद कर शब्दार्थ का अनुस रण न करके केवल भावार्थ का अनुसरण किया है। आशा है पाठक इस अनुवाद को भी पसन्द करेंगे।



दौलतपुर, रायबरेली।
१ जून १९१५


महावीर प्रसाद द्विवेदी