पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/१२३

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राबिन्सन क्रूसो ।

१०६ राबिन्सन क्रू क्रो । को स्वदेश लौटने का सुख भी इस पुख के आगे तुच्छ है।

मैंने इस निरुद्देशयात्रा में जो कुछ सुख का अनुभव किया था उससे कहीं बढ़कर सुख घर आने पर मिला। इससे मैंने संकल्प किया कि अब से कभी अधिक दूर न जाऊँगा। मैंने घर आकर एक सप्ताह विश्राम किया। इधर कई दिनों तक मैं तोते के लिए एक पींजरा बनाता रहा । एकाएक मुझे कुखभवन में बँधे हुए बकरी के बच्चे की बात स्मरण हो आई। मैं उसे घर ले जाने की इच्छा से रवाना हुआ। बहाँ जाकर देखा, वह मारे भूखप्यास के अधमरा सा हो गया है । मैंने पेड़ से हरे हरे पत्ते तोड़कर उसे खिलाये । वह भूख से ऐसा व्याकुल था कि खाने के लोभ से पालतू कुत्ते की भाँति आपही मेरे पीछे पीछे आने लगा। मेरे हाथ से दानाघास पाकर वह ख ब हिल गया। मेरे साथ वह सखा का सा व्यवहार करने लगा । मैं भी उसे जी से प्यार करने लगा। फसल इस द्वीप में मेरा तीसरा साल आरम्भ हुआ । प्रथम वर्ष की तरह दूसरे साल का वृत्तान्त यद्यपि मैं सविस्तर वन न में करता तो भी पाठकों ने समझ लिया होगा कि मैं व लसी बनकर बैठ न रहा था। शिकार खेलना, घर बनाना, रूस थ-सामग्री तथा आश्रम के उपयुक्त वस्तुओो का संग्रह - "प्र र, काम मुझी को करना पड़ता था । त्यादि सब नया काम भी मेरे लिए परिश्रमसाध्य होने से सीखेगल था। दो आदमी जिस तने में से पण न दिन में कम सेकम छः , चर कर