पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२५५

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राबिन्सन क्रूसो ।

२३२ राबिन्सन क्रसे। कुव्यवहार देख विस्मित हो कर कहा-“अरे गधे ! यह क्या कर रहा है ? बह तुझे खा डालेगा : फ्राइडे ने कहा मुझे न खायगा, मैं ही उसे खागा । आप लोग ठहर कर तमाशा देखें और हंसं ” प्राइडे ने ज़मीन में बैठ कर झटपट बूट उतार कर हलका जूता पहना और अपना घोड़ा मेरे दूसरे नौकर को थमा कर वह एक ही दौड़ में भालू के सामने जा खड़ा हुआा । भालु किसी पर कुछ लक्ष्य न कर के झूमता हुआ चला जा रहा था । फ्राइडे ने उस को पुकार कर कहा-‘ओो सज्जन ! कुछ सुनते हो ?’ यह कह कर उसने पत्र का टुकड़ा उठा कर भालू के सिर में माराकिन्तु ढेला मारने से जैसे पत्थर के कुछ नहीं होता वैसे ही पत्थर का टुकड़ा लगने से भालू को भी कुछ न हुआ पर इस आघात स मृद्ध ही कर उसने फ्राइडे का पीछा किया। फ्राइडे भागा । हम लोग भालू को गोली मारने के लिए तैयार हुए । मैं मन ही मन फ्राइडे पर बहुत कुढ़ ने लगा । भालू अपने मन से चला जा रहा था, यह अभागा उसे छेड़ कर यह क्या अनर्थ खुला लाया । मैंने क्रोध कर के फ्राइडे से कहा—अरे गधे ! यही तेरे हास्य का अभिनय है ? तू वहाँ से हट जा, भालू को गोली से मारने दे ।’ फ्राइडे ने कहा, ‘नहीं, नहीं, अभी इस पर गोली मत चलाइए, मैं आप लोगों को खूब हंसाऊँगा ।। भालू एक पग आगे बढ़ता तो फ्राइडे दो डग पीछे हटता। यों ही हटते हटते वह एक पेड़ के पास आ कर बन्दूक को नीचे रख कर पेड़ पर चढ़ गया । भालू भी घोड़े की तरह बड़े वेग से दौड़ कर पेड़ के नीचे पहुंच गया । उसने एक बार बन्दूक को ख्ध कर देखा । इसके बाद वह उतना मेटा ताज़ा । बड़ी आसानी से उछल कर पेड़ पर चढ़ गया है यह देख कर