पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२५५

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राबिन्सन क्रूसो।


कुव्यवहार देख विस्मित हो कर कहा-"अरे गधे! यह क्या कर रहा है? वह तुझे खा डालेगा।" फ़्राइडे ने कहा-"मुझे न खायगा, मैं ही उसे खाऊँगा। आप लोग ठहर कर तमाशा देखें और हँसें।" फ़्राइडे ने ज़मीन में बैठ कर झटपट बूट उतार कर हलका जूता पहना और अपना घोड़ा मेरे दूसरे नौकर को थमा कर वह एक ही दौड़ में भालू के सामने जा खड़ा हुआ। भालू किसी पर कुछ लक्ष्य न कर के झूमता हुआ चला जा रहा था। फ़्राइडे ने उस को पुकार कर कहा-"ओ सज्जन! कुछ सुनते हो?" यह कह कर उसने पत्थर का टुकड़ा उठा कर भालू के सिर में मारा, किन्तु ढेला मारने से जैसे पत्थर को कुछ नहीं होता वैसे ही पत्थर का टुकड़ा लगने से भालू को भी कुछ न हुआ पर इस आघात स क्रुद्ध हो कर उसने फ़्राइडे का पीछा किया। फ़्राइडे भागा। हम लोग भालू को गोली मारने के लिए तैयार हुए। मैं मन ही मन फ़्राइडे पर बहुत कुढ़ने लगा। भालू अपने मन से चला जा रहा था, यह अभागा उसे छेड़ कर यह क्या अनर्थ बुला लाया। मैंने क्रोध कर के फ़्राइडे से कहा-"अरे गधे! यही तेरे हास्य का अभिनय है? तू वहाँ से हट जा, भालू को गोली से मारने दे।" फ़्राइडे ने कहा, "नहीं, नहीं, अभी इस पर गोली मत चलाइए, मैं आप लोगों को ख़ूब हँसाऊँगा।" भालू एक पग आगे बढ़ता तो फ़्राइडे दो डग पीछे हटता। यो ही हटते हटते वह एक पेड़ के पास आ कर बन्दूक़ को नीचे रख कर पेड़ पर चढ़ गया। भालू भी घोड़े की तरह बड़े वेग से दौड़ कर पेड़ के नीचे पहुँच गया। उसने एक बार बन्दूक को सूँघ कर देखा। इसके बाद वह उतना मोटा ताज़ा बड़ी आसानी से उछल कर पेड़ पर चढ़ गया। यह देख कर