पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/३२५

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३०२ राबिन्सन से। राय दी । किसी किसी ने उसका प्रतिवाद कर के कहा कि, ऐसा करने से बड़ी खराबी होगी। जाने का उपाय न रहने से वे लोग मरने पर कमर कस कर नाना प्रकार के उपद्रव करेंगे। हिंदू पशुओं की भाँति जXल भर में घूमते फिरेंगे। उन लोगों के भय से हम लोगों को अकेले बाहर निकल कर काम करना कठिन हो जायगा। तब उन्हें वन्य जन्तुओं की तरह लुढ़ हूँढ़ कर मारना होगा, नहीं तो वे लोग अपने पेट की आग बुझाने के लिए हम लोगों के खेत, खलि हान और पालतू पशुओं को लूट ले जायेंगे। एटकिंस ने कहा यह सही है, सौ मनुष्यों का सामना में स्वयं कर सकता हूं पर सौ जातिय का धक्का कौन सँभालेगा ? ये लोग देश को लौट जायेंगे तो हम लोगों का प्राण बचना कठिन होगा। असंख्य असभ्य बार बार आकर हम लोगों को सतावरी । उसकी यह बात सभी ने पसन्द की। सभी लोग कुछ सूखी लकड़ियाँ बटोर लाये और आग को अच्छी तरह प्रज्ब लित कर डोंगियों को जलाने लगे । यह हाल देख कर असभ्य लोग दौड़ आये और हाथ जोड़ कर धरती में घुटने टेक कर डेगियों की भिक्षा मांगने लगे । वे लोग इशारे से जताने लगे कि ऐसा अपकर्म हम फिर कभी न करेंगे। एक बार देश जाने ही से हम लोग फिर कभी इस टापू में न आदेंगे । किन्तु उन लोगों का देश लौटना तो हम लोगों के लिए हित कर न था। क्योंकि एक व्यक्ति के लौट कर घर जाने और ख़बर देने से इतना अनिष्ट हुआ है, जब ये सब के सब देश में जा लोगों से यहाँ की बात कहेंगे तब तो हम लोगों का सर्व नाश होना ही सम्भव है । हमारे दल के लोगों ने उन की कातर दृष्टि और गिड़गिड़ाहट पर ध्यान न दे कर उनकी डेगियों को