-दूसरे चैम्बर के चुनाव का मताधिकार उनको दिया जायगा जिनके पास प्रचुर सम्पत्ति होगी अथबा जो किन्हीं ऊँचे सरकारी पदों पर कार्य कर चुके होंगे। जमींदारों बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों के हितों को उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर और भी सुरक्षित कर दिया गया है | यह समझना कटिन है कि एक कृषि-प्रधान देश में जहाँ के देहात में सभी आर्थिक और राजनैतिक शक्ति जमींदारों के हाथ में है जमींदारों को एक विशेष हित कैसे मान लिया गया है जिसको विशेष सीटें भी दी जा सकती हैं। निहित स्वार्थों को विशेष सुरक्षा दी गई है और यह सिफारिश की गई है कि जागीर तालुका, इनाम, बतन, मुनाफी इत्यादि नामों से मिले हुए भूमि भाग और सनदों के द्वारा मिले हुए अवध के तालुकेदारों के अधिकार ज्यों के त्यों रहेंगे और धारासभात्रों और कार्यकारिणियों को विना गवर्नरजनरल अथवा गवर्नरों की पूर्व अनुमति प्राप्त किये उनमें हेर फेर के सुझाव रखने का कोई अधिकार न होगा। विधान में वैयक्तिक सम्पत्ति सुरक्षा की भी व्यवस्था की गई हैं। विशेष अवस्थानों में केवल एक निर्दिष्ट प्रकार की सम्पत्ति को पर्याप्त हर्जाना देने के पश्चात ही छीना जा सकेगा और किसी खास प्रकार की सम्पत्ति का राष्ट्रीयकरण करने अथवा उसमें व्यक्तियों के अधिकारों को समात अथवा कम करने का श्राम कानून बनाने से पूर्व गवर्नर- जनरल अथवा गवर्नरों की अनुमति लेनी पड़ेगी । यदि किसी व्यक्ति से कोई सम्पत्ति छीनी गई अथवा यदि उसके अधिकार उसमें कम किये गये तो उसे हर्जाना अवश्य दिया जायगा। जिन प्रान्तों में इस्तमरारी बन्दोबस्त लागू है उनके लिए यह व्यवस्था की गई है कि
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