पृष्ठ:स्टालिन.djvu/४

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प्रात्म निवेदन हमको पोजेफ स्टालिन का जीवनचरित्र पाठकों के सन्मुख इतनी शीघ्र उपस्थित करते हुए प्रसन्नता हो रही है। विधान पाठकों ने हमारी प्रस्तुत योजना को इतना अधिक पसन्द किया कि मन्दिर से प्रकाशित भाचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री कृव हिटलर और युद्ध' नामक प्रथम रचना केवल दो सप्ताह में ही माधी से अधिक समाप्त हो गई। इसी कारण हम अपनी योजना के अनुसार अपने दूसरे प्रकारान के रूप में इस महान क्रांतिकारी नेता का जीवन- चरित्र इतनो शीघ्र पाठकों की भेंट करने में समर्थ हो सके हैं। प्रस्तुत पुस्तक कोई मौनिक मंथन होकर एक राष्ट्रनिर्माणकारी नेता का जीवन चरित्र है, जो पीटर से भी अधिक महान और श्राइवन से भी अधिक भीषण प्रमाणित हो चुका है। आज उसकी छाया मध्य एशिया और समप्र यूरोप पर पड़ रही है। इस पन्ध के लेखक भी त्रिलोकीनाथ विशारद साहित्य क्षेत्र के लिये विल्कुल नवीन व्यक्ति हैं। भाशा है कि हिन्दी के पाठक उनकी इस भेंट को पसंद करेंगे। जैसा कि हम अपने प्रथम ग्रंथ में घोषणा कर चुके हैं, हमको अपने वीसरे ग्रंथ के रूप में इस अंथ के बाद फांस का उत्थान और पतन' पाठकों की भेंट करना चाहिये था। किन्तु इस बीच में यूरोप के राजनीतिक रंग मंच पर इतनी शीघ्रता से एक अत्यन्त विचित्र प्रकार की नवीन क्रांति हो गई कि हमको अपने पाठकों के विशेष अनुरोध से निश्चय करना पड़ा कि हमारा भागामी ग्रंथ रूमानिया के विषय में हो। इस ग्रंथ का नाम होगा 'रूमानिया बलिवेदी के पथ पर। इसके लेखक भी प्राचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री ही होंगे। विनीव- शंकरखास गुण विन्द'