पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/२९८

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वास्पयन्स-चास्पीयपोत था। डायटर हुमने इस सम्बन्ध न्यूकामनयो यथेष्ट ! हो चापराशिको सदा धनीभूत करनेमें समर्थ होता था। उपश प्रदान किया। इससे पहले सिलिण्डर बाहर वारने "एटभस्फेरिक टोम पनि" गौर भी उन्नति -. शीतल जल डाल य.र वापराति घनीभून परनी होती की। इसके बाद इस विभाग कार्टराइट'(Garerright) . : थी। उसमें कष्टकी सीमा न यो, किन्तु सहसा निम्माता का नाम सुना गया। इनके द्वारा पापपन्तको यधेट . हृदयमै एक युद्धि आविर्भूत हुई। उन्होंने एक दिन एका. उाति हुई है। कार्टराइटने ही पहले धातयपिटना : पक सिलिण्डरके बीच में शोतल जल क्षेपण कर देखा व्यवहार किया था। सन् १७२५ ई०में ल्यूथोपने हा... कि उससे सहज दो और जल्दीसे चाप घनीभूत होता प्रेसर एञ्जिनको (Iligh pressure Engine) सृष्टिको। है। इस याप्पफे शक्तियनको गनेक सुविधायें हुई। इसके बाद धीमर, रेल गादि यानों के परिचालन के लिये यह पशिन "एटमस्फेरिक पञ्जिन" (Atmospheric i. गणितविज्ञान साहाय्यसे प्रचुर तथ्य सङ्कलित कर एक Engine ) नामसे अभिहित होता था। घोटन, स्मीटन अभिनवयुग प्रवर्तित किया गया है। वायलरफे याप तैयार गौर भन्यान्य इञ्जिनियर इस यन्त्रको बहुत उन्नत की । करनेकी शक्तिके साथ बाप्पीपपानको गति और तग्नि इस्यो सनको १८वीं शताब्दी में केवल जल ऊपर उठाने- हित भारित्वका विचार करना मायश्यक है । सन् १८३५ फे लिपे ही यह यन्त वाहत होता था। ई० में काउण्ट डी पेम्यरने इसके सम्बन्धी सिद्धान्त संस्था ___टोम पसिनको उन्नति करनेवालोंमें जेम्स वाटका ' पन किया। वाष्पयन्त्रके मययों में निम्नलिखित मायय नाम बहुत प्रसिद्ध है। घे ग्लासगा नगरमें गणित- । ही प्रधान है- समान्त यन्त्रादिका निर्माण किया करते थे। सन् १-चुली गौर जलोत्तापपास ( Furnnce and १७६३ ई० में ग्लासगो युनिघरसिटोफे एक अध्यापकने | Boiler ) उनका एक पटमसफेरिक पञ्जिनका आदर्श मरम्मत करने २-यापान और सञ्चालनदण्ड (Cylindler and . . के लिये दिया । पाटने इस आदर्श यन्त्रको पा कर इसके pisto:) द्वारा गाना तरहकी परीक्षा करनी भारम्भ की, उन्होंने ३ घनत्यसाधक औरस्यायुनिर्माणयन्त्र (Condenser देखा पिटन ( Piston) के प्रत्येक अभिघातफे लियेi and air pump ) शिस हिसाबसे पाप खर्च होता था, यह सिलिण्डरफे मेकानिजम् (Mechanism) इनमें प्रत्येक बहुरे यापको अपेक्षा अनेक गुना अधिक था। चाटने इम अझ और अपाङ्ग हैं। यातुलपके घरसे इन सघ नामों • विषयको परीक्षा करने में जलके याप्पमें परिणत होने का उल्लेख किया न गया। सम्बन्धी कई घटनाओं का सन्दर्शन किया। उन्होंने ये सघ प्राप्पयन्त्र इस समय फितने ही प्रयोजनीय . अपने गयेणाध फलमें यिस्मित हो डाफ्टर ब्लैकसे | कार्यो में व्यवहन हो रहे हैं। रेल, टोमर यापशक्ति- इस गयेपणाको पात कही। इस शुभ सम्मेलनके फल रो परिचालित हो रहे हैं। मालूम होता है, कि गदूर से पापयतको अभिनय उन्नतिका पथ प्रसारित हो भविश्यमें इलेक्ट्रिक रेल यन्त भी समो जगह बाप्पीप रेल. उठा। इमो समयसे सिलिण्डरके माध करडेन्सर यन्त्रका स्थान अधिकार कर लेगा। समोसे ऐसा प्रतीत ( Conilenser ) नामक एक आधार सयोग किया। होता है। गया। इसी आधारफे साहायसे पाप धनीभून दोनेका पापस्येद ( म० पु०) गुल्मरोगा निकलनेयाला उपाय बहुम सदन हो गया । यह कानडेन्सर एक पसीना। गोतल जलाधार पर संस्थापित कर याटने पाप धनोपास्पायपात -१७३७ १० सेनाधान दामने एक छोटी सी भून करनेका उत्तम बन्दोवस्त किया। जलाधारका पुस्तिकाको रमना की। इम पुस्तिकामे उनहोंने टोमर जल गई दोनेसे हो उम जलको फेक शोमल जल दिया। प्रस्तुत करनेकी उपयोगिता विषय पर पालेख लिया जाता था। इस प्रकारसे कनडेन्सर शीतल जलसं संस्पृष्ट । या किन्तु वर्षफे बाद वर्ष बीत गये। इसके साथ