पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४६४

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


४५८ बुर्हानाबाद-बुलदाना वह सम्यकपसे अगरेजोंके दखलमें आयो । १८४६ । पन्थियोंके प्राचीन मन्दिर देखे जाते हैं। जब पूर्णाकी ६०में यहां हिन्दू और मुसलमानके बीच झगड़ा खड़ा हो उपत्यकाभूमि मुसलमानोंके हाथ लगी, उस समय जैन गया था जिसमें दोनों तरफके बहुतसे लोग मरे थे। गजाओंने यहां आधिपत्य फैलाया था। १२६४ ई०में वर्तमान अट्टालिकाके मध्य अकबरशाहका लालकिला दिल्लीके शासनकर्ता अलाउद्दीनने इस प्रदेश पर अधि- और औरङ्गजेवको जुम्मा मसजिद ही प्रधान है । टबनि कार किया और इलिचपुर आदि स्थानों में अपनी पतिष्ठा यरके समयमे ले कर वर्तमानकाल तक यहां रेशम मस- जमाई। धीरे धीरे उनके वंशधरोंके यत्नसे दक्षिणदिग- लिन आदि वस्त्रोंका विस्तृत कारबार होता चला आ रहा वत्ती भूभाग मुसलमानों के शासनमुक्त हुए । १३१८ ई०में है। शहरमें एक मिडिल इङ्गलिश स्कूल, एक बालिका ममस्त बेरार प्रदेश पर मुसलमानोंका अधिकार फैल गया स्कूल और एक अस्पताल है। था। १५३७ ई में अहमदशाह बाह्मनीके लड़के अलाउद्दीनने बुर्हानाबाद -दाक्षिणात्यके अहमदाबाद जिलान्तर्गत एक रोहन-खेर नामक स्थानमें खान्देश और गुजरातराजाकी नगर। मुगलसेनापति शाहबाज खां इम नगरको लूट सेनाको परास्त किया। बाह्मनो राजवंशके बाद इमाद- और विध्वस्त कर गये हैं। शाही राजाओंने यहां आधिपत्य फैलाया। पीछे अहमद बुर्हेला- राजपूत जातिकी एक शाखा। ये लोग रघुवंशी नगर राजवंशका अभ्युदय हुआ । १५९६ ई०में चांदबीबीने और बाई सम्प्रदायको कन्यासे विवाह करते और अमे.. वेरार राज्य सम्राट अकबरशाहके हाथ सौंपा । सम्राटके ठियाओंको अपनी कन्या देते हैं। लड़के मुराद और दानियाल वारी बारीसे यहांके राज- बुलंद ( फा० वि० ) १ उत्तङ्ग, भारी। २ जिसकी ऊँचाई प्रतिनिधि रहे। १६०५ ई०में अकबरकी मृत्यु के बाद अधिक हो, बहुत ऊँचा। आबिसिनिके सरदार मालिक अम्बरने बेरार जीत कर बुलंदी (फा० स्त्री०) : बुलंद होनेका भाव । २ ऊंचाई।। १६२८ ई० तक शासन किया । पीछे सिन्धखेरके बुलडाग ( ०३०) मझोले आकारका एक प्रकारका देशमुख लाकजी यादवराजको सहायतासे सम्राट शाह विलायती कुत्ता। वह बहुत बलवान्, पुष्ट और देखने में। जहानने इस राज्यका पुनरुद्धार किया। उक्त यादवराव भयङ्कर होता है। । मालिक अम्बरके १० हजार अश्वारोहीके सेनानायक बुलदाना-पश्चिम बरार विभागका एक जिला । यह थे। उन्होंने ही शाहजहानका पक्ष ले कर अपने पूर्व- अक्षा० १६१ से २११ उ० तथा देशा० ७५.५६ से स्वामोके अदृष्टाकाशको घनान्धकारसे समाच्छन्न कर ७६.५२ पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण २८०६ दिया था। इसी लाकजी यादवकी एक बोरप्रसू कन्या वर्गमील है। चिखली, मालकापुर और मेहकर नामक ! महाराष्ट्रकेशरी शिवाजीकी माता थी । औरङ्गजेबके तीन तालुकमें यह जिला विभक्त है। राजत्वकालमें १६७१ ई०को शिवाजीके सेनापति प्रताप- यह जिला बेरार बालाघाट पर्वतके अधित्यका देशमें रावने यहांसे चौथ वसूल किया था। पश्चात् १७१७ अवस्थित है। इसको उपत्यकाभूमिमें बहुत-सी पवित्र ई०में सम्राट् फर्रुखशियरके समय मराठोंने यहांसे सलिला नदियोंके बहनेसे यह स्थान कृषिकार्यके उपयोगी | चौथ भौर सरदेशमुखी वसूल करनेकी सनद प्राप्त की। हो गया है। बेणगङ्गा, नलगङ्गा, विश्वगङ्गा, धन, पूर्णा १७२४ ई०में चिन् खिलीच खो (निजाम उलूमुल्क ) ने और काटापूर्ण आदि यहांको प्रधान नदियां हैं। जिलेके सखर-खेदलर (फतेखेदला )-के निकट मुग दक्षिण भागमें लोनर नामक ह्रद है। उस ह्रदके किनारे परास्त किया। किन्तु वे मरहठोंको कर संग्रहसे निवा- उत्कृष्ट कारुकार्ययुक्त एक प्राचीन हिन्दूमन्दिर स्थापित रण न कर सके। १७६० ई०में मेहकर पेशवाके हाथ है। हिन्दूमात्र ही उस मन्दिरको पवित्र समझते हैं। सपुर्द किया गया । १७६६ ई०में निजामने भी पूनाराजकी देवलघाट नामक स्थानमें बेणगङ्गाके किनारे, मेह- अधीनता स्वीकार की। अंगरेज युद्ध में महाराष्ट्र परा- कर, सिन्धखेर और पिम्पल गांव मामक स्थानमें हेमाड- भवके बाद १८०४ ई०को निजामने मंगरेजोंके अनुबह-