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कहा, तुम्हारे वासके लिये जो सकल स्थान निर्धारित हुए हैं,वह सब जन्मभूमिके प्रति यत्न रखकर 'अत्रि' नामसे पुकारे जायें। पीछे उन्हें छोड़ महर्षि सिन्धुदेशमें जा पहुंचे। देवनिका-पर्वतमें कुछ समय रहकर धर्मज्ञानसम्पन्न और पवित्रचेता सकल प्रजाकी सृष्टि करने लगे। उनके वासके लिये उन्होंने देवनगरको स्थापन किया।" किसी-किसी पुराणके मतसे अत्रि मानवसमाजमें वेदप्रचार करनेके लिये इच्छुक हुए थे, जिससे उनके सन्तानरूपमें त्रिमूर्ति का आविर्भाव हुआ। ज्येष्ठका नाम सोम अर्थात् मानवदेहधारी चन्द्र था।मार्कण्डेयपुराणके मतसे जब अत्रिने अनसूयाके प्रति कटाक्ष किया,तब सोम का जन्म हुआ। रामचन्द्र वनवासकालमें महर्षि अत्रिके आश्रममें गये थे। वहां अत्रिपत्नी अनसूयाने सीताकी अङ्गरचना कर दी थी।रामायण-अरण्य० २स० रघु १२॥२७॥ अग्निपुराण ७।२। कहकर मिटा दिया, कि राजाका इसतरह स्तव करना अन्याय नहीं। इससे सन्तुष्ट हो राजा वैण्यने अत्रिको अलङ्कारभूषित सहस्र दासियां, दश भार स्वर्ण और दश करोड़ सुवर्णमुद्रा प्रदान की। अत्रि वह सब पुत्रादिको दे स्वयं तपस्या करने वनको चले गये। ऋग्वेदके अनेक स्थलोंमें कहा गया है, कि अत्रिदेवने इन्द्रकी आराधना की थी। किन्तु भागवतमें लिखा है, कि महर्षिने पृथुराजके यन्नमें इन्द्रको ७४ |
देवाधम और यज्ञविघ्नकारी बताके गाली और उनके वध करनेकी आज्ञा दी थी। भागवत ४।१६।१५। भारतवर्षवाले पश्चिम-पार्श्वस्थ देशसमूहके लोग अत्रिऋषिको 'अद्रिस्' या 'इद्रिस्' नामसे पुकारते थे । अत्रि चन्द्रवंशोद्भव आदिपुरुष हैं। चन्द्रवंशोद्भव देवनहुष राजा एकबार मेरुपर्वतके निम्न स्थानमें अत्रिके साथ साक्षात् करने गये थे। किन्तु वहां किसीको रहते न देख इन्होंने विश्वकर्माको एकनगर बनाने की आज्ञा दी। पीछे उस नगरका नाम देवनहुषनगरी रखा गया। लोगोंने ऐसी विवेचना की है, कि देवनहुष और देवनहुषनगरी यह दोनो शब्द यूनानी दिओन्यसिउष(Dionysius ) और दियोन्यसिवोपोलिससे( Dionysiopolis)परस्पर सम्बन्ध रखते हैं। इससे अत्रिदेव जैसे भारतवर्ष और उसके निकटस्थ देश-समूहवाले सम्प्रदाय-विशेषके आदिपुरुष होते, वैसे ही यूनानी राजा और पूजनीय व्यक्तियों के भी हैं। अत्रिगोत्र आज भी हिन्दू समाजमें प्रचलित है।बस्ती प्रदेशकी सबरिया जातिमें और वङ्गदेशके कायस्थ-समाजमें कितने ही अत्रिगोत्रावलम्बी व्यक्ति देख पड़ते हैं। यूरोपीय पण्डित यह भी स्वीकार करते हैं, कि अत्रिऋषिके साथ प्राचीन युरोपका अति निकट सम्बन्ध था, विलफोर्ड साहेबने लिखा है,- "The most celebrated amongst tliese Parnasas was that of the famous Atri, whose history is closely connected with that of the British islands and this western regions." (Asiatic Researches, Vol. VI. p. 469.) भलसुङ्गके (Volsung) गल्पमें 'अत्लि' और निबेलुङ्गवाले (Nibelang) गानपर 'एजेल' नामक जिस देवताका नाम मिलता, उससे अत्रिका अनेक सादृश्य लक्षित होता है। ( Cox's Myth. of the Aryan Nations, Vol. 1. p. 342.) याज्ञवल्कासंहितामें लिखा है, कि अत्रि एकजन धर्मशास्त्रकर्ता थे। अत्रिसंहिताके नामका एक धर्मशास्त्र भी प्रचलित है।अविसंहिता शब्ददेखो। बृहत्संहिताको टोकामें भट्टोत्पलने लिखा है, कि |
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अत्रि