|
नहीं है। पहले उसकी चतु:सीमा बता चुके हैं। उसके दक्षिणके कितने ही अंशका नाम मलयालम् ' (मलय) है। फिर मध्यांश तुलुब और उत्तरका कुक अंश कर्णाट कहाता है। अनेकोंके कथनानुसार कानाड़ा कर्णाट देशका नामान्तर है। किन्तु यह बात ठीक नहीं। कर्णाट देखो। दक्षिण कानाड़ेके उदीपो परगनेका उत्तर पर्यन्त भूभाग प्राचीन केरल राज्यके अन्तर्गत है। कहा जाता है कि परशुराम क्षत्रियविनाशके पीछे पाण्डा राजावाने जा उस स्थान पर अधिकार किया था। १२५२० तक पाण्डधरान प्रवन रहे। फिर १३३८ई०को वह विजय- नगरराजके अधिकारमें गया। १५६८०को तालि- कोटके युद्ध में विजयनगररानका पराक्रम खर्व हुवा पौर बदनरके सरदारने स्वाधीनता पा बदनर राज्य स्थापन किया। उन्होंने कानाड़े के इनर नामक नौलेश्वर पर्यन्त अधिकार किया था। पीछे चेरकल राजके साथ ईष्टइण्डिया कम्पनीका बन्दोवस्त हुवा। उस समय सत प्रदेश शक्रराज्य कानाड़ाके नामसे लिखा जाता था। कानाडाका उत्तरांश तलुब प्रदेशक अन्तर्गत रहा। १६१से ७१४ ६० तक वह कदम्ब राजापोंके अधिकारमें था। कदव देखो। फिर ७१४से १३३५ई. तक कानाड़ेका उत्तरांश बन्नालवंशके अधीन रहा। बबाल देखो १७६३ई० को हैदरमलौने बदनूरक अधिकार काल कानाड़ाके मध्य मङ्गलोर वासवुर लेने के पीछे मलवार जानेवाली बात। और समस्त जिला अधिकार किया। दो वर्ष पछि अंगरेज सेन्चने इनर और मङ्गलोर जा छुड़ाया था। किन्तु अल्प दिन पीछे ही टीपू सुलतानने पुनरधिकार ' किया। उसके पीछे १९८३-८४ई को टीपूसे अंग रेनोंका दक्षिण कानाड़ेमें महायुद्ध हुवा। अवशेष १७६१ई० को वह सम्पूर्ण रूपसे अंगरेजोंके अधिकारमें पहुंच गया। १८३८ई०को कुर्गराजके साच्यग्रहण के समय अमर और सुलिय प्रदेशके लोगोंनि ख ख प्रदेश अंग रेज राज्यभुक्ता करनेको प्रार्थना की थी। १८३७६०को दृटिशराज उनके प्रस्ताव पर स्वीकृत हुए। समग्र Vol.
IV. 96
|
मगनिस जिला दक्षिण कानाड़ाके पुत्तुर विभागसे मिलाया गया। उसी वर्ष कल्याणाप्पा सुबराय नामक किसी सरदारने कुगैराशके पतनसे अंगरेजोंके विरुद्ध अस्त्र धारण किया। पुत्तुरसे मङ्गलोर पर्यन्त विद्रोह फैला था। उसके पीछे विद्रोही शासित होने पर कानाड़ा प्रदेश दो भागों में बंट बम्बई और मन्द्राज प्रेसीडेन्सी में मिल गया। दक्षिण कानाड़ाका प्रधान नगर मङ्गलोर, बन्तवाल और उदीपी है। उसमें प्रधानतः हिन्दू, पोर्तगीज, फरासीसी, अरब और अनाय लोग रहते हैं। हिन्दुवों में ब्राह्मणोको संख्या अधिक है। वह और कोड-पी नामक दो समाजोंमें विभक्त हैं। द्राविड़ोंसे उद्भूत ब्राह्मण शिवली कहाते हैं। उन्ध देशके अरब मोपला कहाते है। अनार्य स्थानसे लोगोमें मलयकुदिराइ प्रधान हैं। वह जिस प्रणाली कृषिकार्य करते, उसे 'कुमारी' प्रणाली कहते हैं। उत्तर कानाड़ाके मध्य हिन्दुवों में सुपारीके व्यव- सायो हारिक ब्राह्मण ही विख्यात हैं। मुसलमानों में नाविक अरब बपिकों के प्रतिनिधि कहाते हैं। किन्तु वह अल्प संख्यक मिलते हैं। अफरीकासे पानीत पोर्तगीजोंकी कत दासियोंके गर्भजात मुसलमान सौदी नाम आख्यात हैं। उनकी श्रावति इस समय भी बहुत कुछ काफिरोंसे मिलती है। कानाफूसी (हिं० स्त्री०) गुप्तकथन, धोरसे कही जानेवाली बात। कानाबाती (हिं. स्त्री०) १ गुप्तकथन, कानाफसी। २ बालक इंसानका एक कार्य। वालकके कर्ण में कानाबाती कानावाती कू' कहते 'कू' शब्द जोरसे बोलते हैं। इससे बालक हंसने लगता है। कानावेज (हिं. पु०) वस्त्र विशेष, एक कपड़ा। यह सौंकियेसे मिलता-जुलता रहता है। कानि (हिंस्त्री०) १ मर्यादा, इज्जत । २ शिक्षा, सीख। कानिद (हिं० पु० ) बांसको कमची। इससे खरादते समय हीरा पन्ना दवाया जाता है। कानिष्ठिक (सं० लो०) कनिष्ठिका इव, कनिष्ठिका. पण् । शर्करादिमीऽण् । पा ५॥ ३॥1601.कनिष्ठिका सदृश्य। |
पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 4.djvu/३८०
दिखावट
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
३८१
कानाड़ा-कानिष्ठिक