पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२९१

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लारानी लाइन पत्तों टिंगरी नगरमै ससैन्य रह कर निकन सीमानकी, नीय प्रततत्त्व-१८४७से १८६११० में मध्य ४ बार रक्षा करने हे । उक्त नीन सेनानायकके अधीन तीन नीना मुद्रित और प्रकाशित हुए थे। निगपुन्' या 'नन् कमिसनड आफिसर । सके इसके अलावा उन्होंने ग्व अनुसन्धान कर उस समय अन्दावा तिब्धराज्यके मामरिक विभाग और ताई चीन। के गाविष्कृत कोणातार जिन्लाफालकोंसे ३ प्रकारको

कर्मचारी नहीं है। राजकीय जामन धौर विचारबिना पिन्न भिन्न वर्णमाला तैयार पर जनसाधारणके मामने गीय कार्य तिब्यनवासी मह पुरुष द्वारा परिचालित उगी एक तालिमा उपस्चिन की थी तथा जितने होना ६ । समचे तिब्बत में चीनराज्यकी प्राय चार हजार , प्रकारको लिपिया उस समय यूरोपके विधान प्रलतत्त्व बना है। उनमेन्ने लामा नगरमे दो हजार दीघाची विदोंक समाज प्रचलिन थी, इन्होंने उनके अनेक एक हजार, गैनत्मिती पान मी ओर टिंगरीमे पान फलवोंको अनुनाद कर जनमाधारणको समझा दिया था। सानी ( अ० वि०। जिगवा हे ग्लानी या जाट न लाम्फोटनो । मा०) आम्फोटना, मदार । २ वेध- हो, जोट। निका, बर सौजार जिससे मणियों आदिमें छेद परत' मि ( हि • पु० ) लाम्ब हो। मिमा (सं० रन) लामोऽस्यस्य इति लास उन । ' लास्य ( स ० ) लस (वृहत्तापर्यत् । पा ३१६६१२४ ) नर्तका, नाचगाली। दर्शन न्। नृत्य, नाच। २ तारिक, नाच या शनि ( म० ति० ) लम-णिनि । नर्तकी, नाले नृत्य या मेदामन ए, यह नृत्य जो भाव और ताल चाला। आदिके नाहन हो, कोल अनोक द्वारा हो और जिसके लिनी ( सं खी० ) लासिनी, नाचनेवाली। द्वारा यहार आदि कोमल रसों का उद्दोपन होता हो। नामो (ति श्री० ) १ जी तरहका पर प्रकारका साधारणत. बिया का नृत्य ही लास्य कहलाता है, कहते काला कीडा, जो गेहके पेडोंले लग कर उन्हें निम्मा। हैं,कि शिव और पावंताने पहले पहल मिल कर नृत्य पर देता है । २ नसी या दस्मी देखो। दिया था। जिसका नृत्य ताडय कहलाया और पार्वताका मासु (हि पु०) लाव देखो। लास्य। यह लाम्य दो प्रकारका कहा गया है-छुरित हामन ( L.Su)-जर्मनरायर मी प्रसिद्ध पण्डिन : चार यारत । साहित्यइपणम इसके टा अंग रुलाये और श्वेता । ज्योनिप, विज्ञान आदि विषयो इनको , गये है जिनका नाम इस प्रकार है,-गेयपद, रिधतपाठ, असाधारण व्युत्पत्ति था। ये थी मनायीक प्रारम भासान, पुष्पगाण्डका, प्रच्छेदक, विगूढ, सॅन्धयाख्य, विद्यमान थे। इन्होंने रंगरुन, अरबी, पारसी. ग्री. नि. हिगूढ का, उत्तमोचम और युक्तप्रत्युक्त। लैटिनमादि प्राच्य और प्रतीच्य भाषा नमहोती सालो (पु०) लास्यमस्त्यस्यात लाल्य-अच। ३ नत्तक, चना की थी तथा उसी देशके प्राचीन ग्रन्थादि. भारतीय' नवनिया । शिलालिपि और आसिरीय कोणाकारतोलिविसे प्रनतलास्यक ( स० की० ) लास्यमेव खार्थ कन् । नृत्य, को उद्धार र उन्होंने जगवासीदो चमत्कन किया था।। नाच। उनले रचे ग्रन्य सब छप कर यूरोपमै प्रचारित ए थे। लास्था (सं० स्त्री०) लास्यमरत्यरया इति लास्य-अच- नीचे उसकी एक तालिका दी गई है,-hommentation टाप ताहिकाही _amimantation राप। नको, नाचनेवाला। Gcogrupm.ca atque IIistoricaile Putaponia'लाह (हिना०) लाग्य, चपड़ा। २ मत, आभा । Indica १८२७ ६०, बन्न नगर, De Airpersischen, (पु.) 3 लाभ, फायदा। १८३६ ई०मे, कायेल नगरमें, Die 1 aprobuc Insula लाहन (हिं० पु० ) १ वह महुआ जो मद्य खींचने के उप- १८४४०, Indisele kitcitihumstrund: या मार रात देगर्म बच रहता है। यह प्रायः पशमों को खिलाया