पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


मलयप्रभरि मलयानि मलयप्रमसूरि-एक जैगरि । इन्होंने मानतुङ्गमूरिकृत , हिशास्त्र में लिखा है, कि परशुरामने समुद्रसे इस सिद्धजयन्तको टोका लिखी है। उक्त टीका १२६० ' स्थानका उद्धार किया था। पोळे भिन्न मिा समय, विक्रम संवत्में रची गई थी। भिन्न भिन्न राजाने इस पर अधिकार जमाया। काली- मलयभूभृत् (स.पु०) मलयपर्वत । कटफे अधिपति, कानपुरको येगम, वियाहोरके राजा, मलयभूमि (सं० स्त्री०) हिमालय पर्वतस्थ स्थानभेद, हिमा-। पुतंगीज, ओलन्दाज, फरासी और टीपू सुलतान,- लयके एक प्रदेशका नाम । ये सब क्रमशः केरलके अधिश्वर हुए थे। वर्तमान समय- मलयराज-एक प्राचीन कवि ।

में यह एक एकमात्र हिंग-गयएटफे, अधोग है।

मलयवाट (संपु०) मलयानिल, मलय पवतकी ओरसे। मलयालमफे प्रायः समो स्थान पर्वतमालासे परिपूर्ण है। मानेवाली वायु। । वीच योचमें उपत्यका भो देवो जानो है। तमिल भाषा. मलयवासिनी (सरो०) दुर्गा । ( हरिवंश १०।२४५ में मलय शब्दका अर्थ पर्वत और अलम शम्दका अर्थ मलया (स' स्रो०) मल कयन्-टाए । १ विवृता. निसोध। उपत्यका है। इसी कारण इसका तामिल नाम.'मलया. २ सोमराजो । ३ यकुत्री। लम्' हुआ है। इसे फेरल भी कहते हैं। केरल नाम: मलयागिरो (सपु०) मलयगिरि देखो। की उत्पत्तिके सम्बन्धमें कोई विशेष प्रमाण नहीं मिलता, मलयाचल-धम्यई प्रदेशके सह्याद्वि-पर्वतका एक मंशा पर कोई कोई 'केरम' अर्थात् नारिफल (नारियल) शम्दसे म्कन्दपुराणके मल याचल म्यण्डमै यहाँके देवतीर्थादिका । केरल नामकी उत्पत्ति पनलाते हैं। फिर किसी किसी विषय सविस्तार लिखा है। का कहना है, कि फेरल गामक यहां एक प्रयल राजा मलयाचल (सपु०) मलयश्चासायलिश्चेति । मलय । राज्य करते थे। शायद उन्फे नामानुसार इस प्रदेशका पर्वत नाम फेरल रखा गया होगा। "पुग्नागनागकरवीरकृतोपकारे यहांके प्रधान भधिचासो नायर जाति है। ये लोग तस्मिन् गृहे कमरपत्रमणे शयीत् । । मलयाल-द्र नामसे भी प्रसिद्ध है। मलयालम इन- यत्राहतानिनविकम्पितपुप्पदाम्नि । की भाषा है। किन्तु तामिल भाषाका भी प्रभार देगा मन्तविन्ध्यमियन्मलयाचज्ञानाम् ॥" जाता है। भारतके मन्यान्य प्रदेशमि भा आर्य और (मुभव उत्तरत० ४७ भ.) मलयादि (सपु०) मलयपयंत । अनार्य जातिके नाना सम्प्रदाय इस स्थान मा कर इस गये हैं। ये लोग साधारणतः कनाड़ी, गुजराती, हिन्दु, मलयानन्दसरस्वती-एक विम्यात पण्डित । पाप गडरा चायके मतपीपक थे और भाचार्यकपर्ने उक्त मतका प्रचार स्तानी आदिमें बोलचाल करते हैं एतद्भिन्न यदा मापिल्ला कर गये हैं। नाम एक श्रणोका मुसलमान भी रहता है। भरवदेश से मलयानिल (स' पु०) मलयस्य अनिलः । १ वमन्त. जिन सब मुसलमानि पहले मलबारमे उपमिया वसाया कालीन वायु, वसन्तकालाको हवा । पर्याय-वासन्त ।। धा, उन्होंके औरस और मलयारो रमणोफे गर्मसे जो . "स एवं मुरभिः कालः स एव मनमानिलः। सन्तान उत्पन्न हुई यहाँ 'मापिल्ला' कहलाई। मा का सेपेयमत्रता किन्नु मनोदय हरयते।" अर्थ माता और पिलाका मा पुत्र है। अतः मापिल्ल (साहित्यदर्पण २१२६) का अर्थ मा का पुत्र होता है। २ सुगन्धित बायु । मलयपर्वतको मोरसे आनेवाली | मापिटा जाति बहुत बलिष्ठ और साहसी है। वायु, दक्षिणको वायु। मलयालि-दाक्षिणात्ययासो एक पहाड़ी जाति । ग्रेती. मलयालम भारतवर्ष के दक्षिण पश्चिममें अवस्थित एक | वारो और पशुपालन हो इनको एकमात्र उपजीविका है। प्रदेश । यह चन्द्रगिरिसे कुमारिका अन्तरीप तक विस्तृत | बहुनेर शेयारय पहाडके उपत्यकाम्धिन प्रामों में रहते हैं। ६। इसे केरल भी कहते हैं। रिस देखा। मुना जाता है, कि पे लोग १३यो सदोम काशीपुरम पदा