पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४

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मन-मलकापुर २ विष्ठा, पुरीष। ३कि. मेल। अमरीका भरतने मलकाछ (हिं० पु० ) ठाकुरों के रङ्गारके लिये प्रहार- लिमा पाप किरियां, पिट पिटराकि, कानको, मगदूरादि फो कउनी। इसमें तीन मध्ये लगे रहते है। स्पैदादिच एषु मनः। मलकानगिरि-१ मान्द्राजके विशाम्रपत्तन मिलेको तद- "वसा शुक्मयाना मूर्य विट कर्पयिषणस्याः। मोल। भूपरिमाण २३९६ वर्गमील और जनसंख्या ३५ रले माधुदूषिका स्येदो द्वादशैते नृप्या मनाःn" (भरत) हजारसे ऊपर है । इसमें एक शहर और ५६६ माम लगते मनुष्यमातमें पारद प्रफारफे मल है यथा, यसा, इस तदसोलफे अन्तर्गत अनन्सपल्लो भौर मलकान- शुभ, भरक, मना, मूत्र, विष्टा, कानका मैल, नगर, कफ, गिरिमें पत्थरका एक प्राचीन दुर्ग है। स्, शरीरका मल चोर पसीना। ४ कप, कपूर। उक तहसोलके अन्तर्गत एक नगर। स्थानीय ५पातपित्त कफ। दुर्ग यहांको प्राचीन समरिफा परिचायक है। "गामेव रोगाया निदान रुपिया मनाः।. मलझाना (दि० फि०) दिलाना, धोलाना ! असे मार तत्प्रकोपस्य तु प्राक्त विविधाहितसवनम् ॥" मलकाना। २ वना यना कर दारों करना। (निदान) मलकापुर-मद्रास प्रेमिटेन्सीमें कृष्णा शिलान्तर्गत मल शम्दया अयं पायु, पित्त और कफ हो समझा | एक प्राचीन ग्राम। यह गन्दी प्रामसे १७ मोल जाता है। यायु, पित्त और. फफके विगहनेसे सब तरहये उत्तर पश्चिम कोने पर मुनियार भयोफे किनारे रोग उत्पन्न होते है। पारिमायिक मल- पसा है। यहां पफ मन्दिरका भग्नावशेर दिसा देता है। इसके चारों ओर चहारदीपारी दी गई है। इस "भत्रियस्य मन भक्ष्य प्रामपत्यारतं मालम् । मान पृथिव्या वादीका स्त्रोणो मदमियो मलम् ॥" मन्दिरको प्रतिमूत्ति टो फ़्टो नजर भासो है। यहाँ (भारत ८४५२३) अधियासों इस स्थानको जैनालपाइगमसे पुकारते हैं। क्षतियोंका मात्र भोग मांगना है। ग्राणोका मल ध्वंसावशेषको मालोचना फरनेसे मालूम होता है, मयत रहता अर्थात् अधर्माचरणमें रत रहना है। पृथ्यीका ) कि समावतः पहले इस प्राममें यौहाँका अधिकार प्रा। इसके वाय शेषोंने इस पर अधिकार जमाया। साय. मल पाडीक और नियोका रूपगर्य दी मल है। दूपण, विकार । ७ शुद्धतानाशक पदार्थ। वाम गणेशकी विशाल भूचि उल्लेखनीय दोप, पुराई। दोरका एक दोष। १० प्रष्ठति, दोष । मलकापुर--कृष्णा जिलेफे अन्तर्गत एक पुराना प्रांग । | यह पेशापासे चार कोस उत्तर-पश्चिम कोने ११ जेनशास्त्रानुसार मात्माधिन दुए माय । यह पांच | पर प्रकारका माना गया है-मिथ्या शान, अधर्म, सक्ति, हेतु । पर है। यहांको एप. मसजिदसे का शिलालेखनिया मौर न्युति। है, उससे पता लगता है, कि कोएटापलिके पदादी दुर्ग मल (वि०१०) फौलयानों का एक सातिक सदजो। को जीतगेयाला मशानदय अलीपन मलकुने मन दाधियोंको उठानेके लिये कहा जाता है। । १५३५ १०में यहां एक सराप पमा । मलफ ( स० पु०) मध्यदेशोप जनपदभेद । मलकापुर- पराफैि.युल्दागा मिलेका सानुक । पद या (मापु. ५५३५) । २०३३ से २१ २३० तथा देवा० ३६० मलना (दि० कि० ) पहिलना, सोलना। २ इतराना, मध्य भपस्थित है। भूपरिमाण १२ पमील । इस तालुकमें मलकापुर मोर मान्दरा गामक दो गदर मार मलकरन (हिपु०) बरतन पर काशी करनेवालोंका २८८ प्राम लगते हैं। एक औसार । इससे गोदमे पर दादरीमकोर बनता है। २ उक सालुकका एक गहर। यह मा० २०५३ मलकण ( स Re ) मल या विकारको साफ उ० तथा देशा० ११५३० पूर्णागदोको शाखा नल. माफ किनारे मरियन है। याबदास ३०८ मील करनाn