पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४९१

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मान्द्राज १८८२ १८६१ १८६६ __(अस्थायी) ४३३ ७१ ड्य क आय वाहिम और लोकल बोर्डकी देनरेखमें दो चार गांवके वोचमें छोटे चान्दोस् १८७५ ई०सन् छोटे वयोंके लिये पाठशाला खोली गई। इस प्रकार दिनों ७२ राइट आनरेवल विलियम दिन विद्याशिक्षाको उन्नति होती गई। अभी सैकड़ों पादिक भादम प्राइमरी, मिडिल और सेकेण्डो स्कल, ६०० वालिका ... ७३ विलियम हाडलटन G.S.I. १८८१ स्कूल तथा कितने ही हाई स्कूल, ५० फालेज, नीति, . ७४. मनष्टुयार्ट एलफिटन चिकित्सा, सनिजतत्त्वपूतविद्या ( Engineering ) .. प्राण्टडाफ C. I. E. कालेज, सैदापेट और राजमन्द्रो में २ सरकारी ट्रेनिंग । ७५ आर वुर्क कालेज और ५५ शिल्पकालेज है। १८५७ ई०में मांद्राज- . .७६ गार्डिन 0.s. I. १८६० विश्वविद्यालय स्थापित हुआ। मुसलमान लड़कोंके ७७ लाई विधेनलक पढ़नेके भो स्वतन्त्र स्वाल और कालेज हैं। इनमें मार-

७८ सर ए, इ, हावलक्

फरके नवाय द्वारा १८५१ ई०में स्थापित मदरसा-इ- ७६ लार्ड एमथिल १६०० आजम, मैलापुर मिडिल गौर हारिस स्कूल, १८७२ ई० में ८० जेम्स टामसन १६०४ स्थापित एलिमेण्टी स्कूल प्रधान है। स्कूलके अलावा ८१ गावरिल टोपस १९०६ कितने अस्पताल और चिकित्सालय हैं। मेसिडेन्सी भरमें ८२ सर मारथर लावली १९०६ । ८६०१ सेना हैं जिनमें २७३१ गोरे और ५८७० देशी हैं। आवहया फुल मिला कर अच्छी है। यहां गरम बहुत ८३ सर टामस डेविड-गिवसोन १९११ , और जाड़ा कम पड़ता है। कारमाइकेल २ उक्त प्रेसिडेन्सीका एक प्रधान शहर । यह अक्षा - 28 सर मुरे मिक १९१२ । १३४ उ० तथा देशा० ८०१५ पू० बङ्गालको खाड़ीके (अस्थायी) किनारे अवस्थित है । इस नगरकी नामनिरुक्तिके . ८५ राइट आनरेन्ल घेरन पेण्टलैण्ड १९१६ , सम्बन्धमें विभिन्न मत देखा जाता है। कोई कोई . .-८६ सर ए. जी. कारटू १९१६ .. मण्डराज या मएडलराज शब्दसे, कोई मादासा शब्दसे (यस्थायी) मान्द्राज नामोत्पत्तिको कल्पना करते है। फिर ८७ राइट आनरेन्ल वैरन कोई कोई महाभारतोक मद्र या माद्रदेशसे इस नामको विलिङ्गडन उत्पत्ति बतलाते हैं। नायक-सरदार चेन्नप्पोके नामसे __..८८ सर सी. टोड हण्टर १९२४ , इसका चेन्नपत्तन नाम हुआ है। उस समय लोग इसे (अस्थायी) मान्द्राजपत्तन भी कहते थे। ... ८६.भाय-काउण्ट गोसेन १९२४ , १६३६ ईमें भरमागांव कोटीके अध्यक्ष मि० झांसिस . ,१८२२ ई०में सबसे पहले सर टामस मनरोने विद्या-1 डेको विजयनगरराजवंशावतंस चन्द्रगिरिफ अधिपति शिक्षाको भोर विशेष ध्यान दिया । १८२६ ई०में १४, श्रीरङ्गराय लूसे वाणिज्य करनेके लिये जो भूमि मिली फलफूरेट और ८१ तालुक स्कूल खोले गये । १७४० ई० में थी उसीके ऊपर वर्तमान मान्द्राज शहर वसा हुआ है। लाई एलेनवराने एक युनिवसौंटी धोई स्थापित किया भूमि पा कर अंगरेज सौदागरीने एक फोठो खोली और और तदनुसार हाई स्काल तथा फालेज खोले गये। बादमें उसे सुरक्षित करनेके लिये चारों योर दायार खड़ी राजमहेन्द्रीके सब-कलपटर मि. जी. एन टायलरने वर्णाः। कर दो। तभीसे उस दीवारफे बहिर्भागमें देशीय लोग पयुलरफी उन्नतिके लिये नरसापुर तथा आस पासफे बस गये। . तीन शहरों में पलिमेण्ट्रो स्कूल खोले। १८५५ ई०में | १६५३ ई. तक यह पाएटामके अध्यक्षके अधीन ___ol. ITU. 100