पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३३८

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केन्दिय धारासभा में, इसके अनुसार, मुसलिम प्रतिनिधित्व निर्वाचित भारतीय प्रतिनिधियो का तिहाई निर्धारित किया गया। मान्टेम्यून्वेम्सफर्द शासन-योजना मे इसी अनुपात से मुसलमानो कौपृथकूप्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था की गई। सन् १९३२ मे रेमजे मैंकडान्तड ने 'साम्प्रदायिक निर्णय7 से पृथकू प्रतिनिधित्व मुसलमानो के लिये सुरक्षित रखा, किन्तु अनुपात मे परिवर्तन कर दिया

  लन्दन-नों-सरिध-२५ मार्च १६३६ को, लन्दन मे प्रेट-छिटेन, संयुक्त

राज्य अमरीका तथा फान्स के बीच हुई सन्धि I इसका उद्देश्य नौ-सेनाटे शरुबीकरण मे कमी करना था I इटली ने पीछे इसमे शामिल होना स्वीका कर लिया, किन्तु जापान ने शामिल होना मजुर नहीं किया । इस रुन्थिवै निश्चय किया गया कि वजन ओर तय्यारी के लिहाज़ से ३५,००० टनद्दे अधिक भारी जगी जहाज न बनाये जावें और बनाते समय हस्ताक्षस्कत्त राष्ट्र एक दूसरे को सूचित करदें।

  यह सधि ३१ दिसम्बर १९४६१तक के लिये वैध मानी गई यौ, किंन्तु बीच

मे यह धारा जोड़ दीगई कि यदि संसार के अन्य राष्ट्र नौसेना मे वृद्वि करें, जिससे सन्धिक्रर्ता राहो को इत्रतरा हो तो, इस सधि की शर्तें पहले भी भग झे सकेंगी 1 जव जापान ने अपनी जहाजी तय्यारी बताने से इनकार किया, और पता चला कि उसने ४०,००० टन के जहाज बनाने शुरू कर दिये हें तत्र' २९ क्त १६३८ को, इस सधि पर हस्ताक्षर करनेवालों ने ३५,००० टन से ४५७० ० ० टन के जहाज़ बनाये जाने की घोषणा करदी ।

  लाजपतराय, पेजाब-केसरी लात्ता-जन्म २८ जनवरी सन् १८६५;

सन् १८८० मे पैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की, सन् १८८२ में एफ० ए० की तथा मुख्तारी की परीक्षा, सन् १८८३ ये, अपनी जन्मझू'मे, जगरोंव मे, मुख्तारी शुरू की; जगरोंव से रोहतक आगये I यहाँ आपने झोडरा'शेप पास की ओर सन् १८८६ मे हिसार आकर वकालत शुरू की I १८९२ ई० भे' इसी सिलसिले मे, लाहोर चले गये I यहीं से लालाजी का सार्वजनिक जीवन आरम्भ होता है I स्वर्गीय गुरुदत्त विद्यार्थी से, आप अपने विद्यार्धिक्वेजीवन से हीच्चाशभाबित थे! लालाजी ने आर्य-समाज मे अग्रगरुय भाग लिया । पंजाब