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कैलॉग-ब्रियान्द-समझौता
 


रक्षा करने के लिए साथ-साथ चलता है। यह दो प्रकार के होते हैं। एक बड़े और विशाल तथा दूसरे हलके और छोटे।

केन्द्रियतावाद--इस राजनीतिक प्रणाली के अनुसार देश के समस्त प्रान्तो का शासन एक केन्द्रीय सरकार द्वारा होता है। इसके विपरीत संध-शासन में प्रत्येक प्रान्त तथा राज्य स्वतन्त्रता से अपना शासन-प्रबन्ध करता है।

केन्द्रीय असेम्बली कांग्रेस-दल--केन्द्रीय असेम्बली (घारा-सभा) में कांग्रेस दल के प्रायः ४० सदस्य हैं। श्री भूलाभाई देसाई इस दल के नेता हैं तथा श्री सत्यमूर्ति इस दल के उपनेता। यह केन्द्रीय धारा-सभा का विरोधी-दल है। सन् १९४० में, युद्ध-अर्थ-मसविदे (विल) का विरोध करने के लिए, इस दल के सब सदस्य, प्रायः एक साल की अनुपस्थिति के बाद, पुनः उपस्थित हुए। कांग्रेस-दल ने इस बजट-मसविदे का प्रबल विरोध किया और वह असेम्बली द्वारा अस्वीकार कर दिया गया।

केन्द्रीय धारा-सभा(Central Assembly)--यह ब्रिटिश भारत की भारतीय धारा-सभा के बड़े संगठन का नाम है। इसकी स्थापना, मान्टेग्यू-चेम्सफर्ड सुधार-योजना के अनुसार, सन् १९२० में, हुई थी। तब से यद्यपि सन् १९३५ का नया शासन-विधान प्रान्तो में लागू हो चुका है, तथापि भारतीय व्यवस्थापिका सभा में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।

कैटालोनिया--यह प्रदेश स्पेन के उत्तर-पूर्वी कोण मे स्थित है। इसमें कैटालान लोग रहते हैं। यह स्पेन का सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रदेश है। इसकी जन-सख्या ६०,००,००० है। सन् १९३३ में उन्हे प्रजातंत्रवादी स्पेनिश सरकार ने स्वराज्य दे दिया। स्पेन के गृह-युद्ध मे फ्राको की विजय होजाने से फिर यह प्रदेश स्पेन के अधीन होगया।

कैलॉग-ब्रियान्द-समझौता--यह समझौता पेरिस-पैक्ट के नाम से भी प्रसिद्ध है। २७ अगस्त सन् १९२८ को पन्द्रह राज्यो की सरकारों ने मिलकर यह समझौता किया था। यह समझौता तत्कालीन संयुक्त राज्य अमरीका के वैदेशिक-मंत्री फ्रांक वी० केलॉग तथा मोशिये ब्रियाद, फ्रांसीसी वैदेशिक-मंत्री, के सहयोग से हुआ था। इस समझौते के द्वारा, १५ राष्ट्रो ने युद्ध को, राष्ट्रीय