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अद्भुत आलाप


वह न बतला सका। पता लगाने से मालूम हुआ कि ये नाम उन स्त्रियों के हैं, जिनके सामने उसने, तीन वर्ष पहले, यह गीत गाया था। इससे यह ज़ाहिर हो गया कि पहला हाना मर नहीं गया था, किंतु कहीं सो रहा था।

पहले हाना का पुनर्जीवन

कुछ दिन बाद हाना साहब न्यूयार्क भेजे गए। वहाँ उनके शरीर के भीतर सोए हुए व्यक्ति को अच्छी तरह जगाने का यत्न होने लगा। वह एक होटल में ठहराए गए। होटल ख़ूब सजा था। मनोहर बाजे बज रहे थे। गाना भी हो रहा था। तीन घंटे के अनंतर वह सो गए। जब वह उठे, अपने भाई से उन्होंने पूछा कि मैं कहाँ हूँ। दूसरा हाना ग़ायब हो गया; और पहला हाना फिर प्रकट हुआ। छ हफ़्ते पहले गाड़ी से गिरने की बात को छोड़कर बीच की और सब बातों का उन्हें कुछ भी ज्ञान नहीं रहा। उन्होंने समझा, मुझे कल ही चोट लगी थी। और रात-भर मैं सोया था। शाम को उसने तंबाकू पी थी। उसकी गंध उसे मुँह में मालूम हुई। इस पर उसे आश्चर्य हुआ, क्योंकि पहले हाना ने बरसों से तंबाकू नहीं पी थी। कोई ४५ मिनट तक तो यह दशा रही। पीछे वह फिर सो गया। जागने पर पहला हाना ग़ायब हो गया, और दूसरा फिर शरीर में प्रविष्ट हो आया।

हानाओं में परस्पर लड़ाई

४५ मिनट तक हाना २६ वर्ष के स्मरणवाला पुरुष रहा,