पृष्ठ:आलमगीर.djvu/२३८

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पोरे पैन हो गए। औरणजेशपायम करने को पूर्ण प्रव और उभूला न मिल गया। ही समय से बायाम शाम मिला। उसमें मिला पा "मेरे पारे पद, मैं हमेशा पार करवा पायोरिदम मेरे तसे बोधौर से प्रतिभाशमी पुष हो। मैं वाइवा पाकि दम नियरितीरिव परगार बन प्रवे, मगर न पाने शरा) पा ममूहै। मैं पाला पाहिजे में होकर मैदाने का में मावा और देखता कि मेरे ही नममयम नौकर और मुझप पुष वैसे मेप मुकाविला पर। मगर तुमने मेरे दापे और म0d पर परस साल पुरा गरा मोह हिप-मौर रियम होडमबिए मैने मारी मारे मुखानिकही किया। परन्तु मेडे, में प्रम र वाबिमा कमान शिकोह म मा बाप- तराई मत करना । बलि मैं नही कर सकता, सिर से दुमाया कि मासको नयारे दिम्दवा । परत एराकी रात सीरिश में भी उसे सूपना मिही पी लिप्रमी औरणावपापसामा नही पा सपा, सलिए पा पारवा पाबि स पर हर फो। ममर निवारपाची सरपये मे और से सरसका पापाका उमदेवार्थ पूर्व महीने की पाराशरमे से येते रंगे। पर मोसमेत तर शुभ पाकिमोदी मोहनेवी देशरी मुधम्मस हो पायपीना भोपामा तीन भर परेमा।बोरणमैरीधा संवा हाया। इसलिए मामो में -ए, ममी गुम मुदत में वीन दिन है, भाग से बोरे दिन भापके सितारे इनमे दुखद हमारी माका दुनिया में माया" दाय मी मन में मुहेमान हि कमाने प्रतीक्षा कर पा रस प्रघर दारा सरम लिए. पुपचाप और दो दिन करमन वामने पाया। पाठ