पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/११८

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पवन पाएन अनल सो शनिल' नलिनमाला नलर मेयो,' .. . अनिल"न लाउरी लाउ मलया-अली। ___एक इन अनंग · अनेरी दही 'बालम' हो, ... दूजे प्रानि चाँदनी या दाहति भाँती भली ॥२३॥ - पवन-वणन::. . ... ! धारक 'जो ब्रजराज ब्रज' तज्यो अब प्रध, -, ६. सघ. मिलि एंक' बार-बैरी भये घरज्यों। मुरस्त्र मयूख-हिम हुमंकि लाहुमकिाहनी .. हमहिं ये जानै हिया ही मैं हिमकर ज्यों। जलजायली ते ज्वालाजाल जलजाल जरै, _ लाल लाल भरि हग जुग जलधर ज्यों। । एक मनु मारे में तो मार राहीको मारी मरी: दुजे 'मारै मरुत प्रवेश विपसर ज्या ॥२४॥ सघन, घटा घुमरि : जगु रह्यो घन घिरिश : घेरि घहरातः जातः सिंधु भरिः नीरं जू। 'आलम' सिखिनि:सुनि सयद सुहाये सुर:- बूंदनि के संग बहै सीतल समीर जू। १-अनिल = पवन ! २-मल-नावक की नलिका । ३-भनेरी - . व्यर्थ हो। ४-मयूखहिम - अंदमा। ५-सितिनिमोर ।।