पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/७७

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  • श्रालम लिहा.

हादसा 'थालम' कहै हो भूली भोरह ते भोरे आइ, ...' द्वारे झूमि झाँकी कान्ह देखि ने ही लये। लटपटी पे, लखि चटपटी लागी आँग, .. अटपटे आये लाल मोहिं ‘लटू के गये ॥१४११॥ वन सो घनिकै वनधारी ब्रज खोरि आर . याँसुरी घजाई बाँधे , वनिता विवेक२ के। सुनि धुनि धाई वसकाम धामकाम तजि, .. गैझे प्रभु 'आलम , यिलोके यार एक के । उझकि झरोखें फिरि चाहि चली ग्राली घर, " ठगि ठौर कान्द रहे. टेकेप्रीति-टेक के । ' म्रकुटी कुटिल चले लोचन तिरीके तीखे, 'मनु कटि गयो सु-कटाक्ष लागे नेक के ॥१४२॥ आँगन हो; खरी हों मगन भई छगुनंत, .. स्याम भंग नीको वाके संग ही न गौनी में। . 'मनहिं मरोरि तोरि चोरि संग डोरि, सखी, नयो नेहु जोरि सोरी गोरी खोरि कौनी में । १-भोरे श्राइ घोखे से प्राकर । २-बाँधे बनिता विवेक = स्त्रियों की विवेक बुद्धि को चौब दिया (विवेक शक्ति मार दी)। चार बाल । '५--नेक केतन से। ५-छगुनत - विचार करते हुए।