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कर्बला

मु०---किसी मुसलमान के लिए इससे बड़ी शरम की बात नहीं हो सकती कि वह किसी को महज़ दौलत या हुकूमत की बदौलत अपना इमाम समझे। इमाम के लिए सबसे बड़ी शर्त क्या है? इस्लाम का सच्चा पैरो होना। इस्लाम ने दौलत को हमेशा हक़ीर समझा है। वह इस्लाम की मौत का दिन होगा, जब वह दौलत के सामने सिर झुकायेगा। ख़ुदा हमको और आपको वह दिन देखने के लिए ज़िन्दा न रखे। हमारा दुनिया से मिट जाना इससे कहीं अच्छा है। तुम्हारा फ़र्ज़ है कि बैयत लेने से पहले तहक़ीक़ कर लो, जिसे तुम ख़लीफ़ा बना रहे हो, वह रसूल की हिदायतों पर अमल करता है या नहीं। तहकीक़ करो, वह शराब तो नहीं पीता।

कई आ॰---क्या ख़लीफ़ा यज़ीद शराब पीते हैं?

मुस०---यह तहक़ीक़ करना तुम्हारा काम है। जाँच करो कि तुम्हारा खलीफ़ा ज़नाकार तो नहीं।

कई आ०---क्या यज़ीद ज़नाकार है?

मु०---यह जाँच करना तुम्हारा काम है। दर्याफ्त करो कि वह नमाज़ पढ़ता है, रोज़े रखता है, आलिमों की इज़्ज़त करता है, खज़ाने का बेजा इस्तेमाल तो नहीं करता? अगर इन बातों की जाँच किये बगैर तुम महज़ जागीरों और वसीकों की उम्मीद पर किसी की बैयत क़बूल करते हो, तो तुम क़यामत के रोज़ खुदा के सामने शर्मिन्दा होगे। जब वह पूछेगा कि तुमने इन्तख़ाब के हक़ का क्यों बेजा इस्तेमाल किया, तो तुम उसे क्या जवाब दोगे? जब रसूल तुम्हारा दामन पकड़कर पूछेंगे कि तुमने उसी अमानत को, जो मैंने तुम्हें दी थी, क्यों मिटा दिया, तो तुम उन्हें कौन-सा मुँह दिखाओगे?

कई आ०--–हमें ज़ियाद ने धोखा दिया। हम यज़ीद की बैयत से इनकार करते हैं।

मु०---पहले खूब जाँच लो। मैं किसी पर इलज़ाम नहीं लगाता। कौन खड़ा होकर कह सकता है कि यज़ीद इन बुराइयों से पाक है।

कई आ०---हम जाँच कर चुके।

मु०---तो तुम्हें किसकी बैयत मंजूर है?

शोर---हुसैन की! रसूल के भवासे की।