पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/११

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कवि-प्रिया
पहल प्रभाव

कवि - प्रिया पहला प्रभाव श्री गणेश-वन्दना गजमुख सनमुख होत ही, विधन विमुख कै जात । ज्यो पग परत प्रयाग-मग, पाप-पहार बिलात ॥१॥ श्री गणेश जी के अनुकूल होते ही विघ्न इस प्रकार दूर हो जाते हैं, जिस प्रकार प्रयाग के मार्ग मे पैर पडते ही पापो का पहाड लुप्त हो जाता है। श्री वाणी वन्दना वाणी जू के वरण युग सुवरण-कण परमान । सुकवि सुमुख कुरुखेत परि, होत सुमेरु समान ।।२।। 'वाणी' जी (श्री सरस्वती देवी) के दो अक्षर, वास्तव मे स्वर्ण के कण है जो सुकवि के सुन्दर मुख रूपी कुरुक्षेत्र में पड कर सुमेरु के समान हो जाते हैं। ____ गणपति दन्त वर्णन सत्त्व सत्त्व गुण को कि सत्य ही की सत्ताशुभ, सिद्धि की प्रसिद्धि की सुबुद्धि वृद्धि मानिये । ज्ञान ही की गरिमा कि महिमा पिवेक ही की, दरशन ही को दरशन उर आनिये ॥ पुण्य को प्रकाश वेद-विद्या को विलारा किधौ, यश को निवास 'केशौदास' जग जानिये । मदन-कदन-सुत-बदन-रदन किधी, विधन विनाशन की विधि पहिचानिये ॥३॥